देशभर के स्ट्रीट वेंडर्स और छोटे व्यापारियों के लिए बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण ने लाइसेंस और रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को सरल बनाते हुए नए नियम लागू किए हैं, जिससे लाखों वेंडर्स को सीधा फायदा मिलेगा।
नए नियमों के तहत, थड़ी-ठेला लगाकर खाद्य सामग्री बेचने वाले स्ट्रीट वेंडर्स को अब हर साल लाइसेंस नवीनीकरण (रिन्यूअल) कराने की बाध्यता से राहत दी गई है। 2014 से पहले रजिस्टर्ड वेंडर्स को दोबारा रजिस्ट्रेशन कराने की जरूरत नहीं होगी, जबकि 2014 के बाद पंजीकृत वेंडर्स को केवल एक बार रजिस्ट्रेशन कराना होगा।
इसके साथ ही रजिस्ट्रेशन शुल्क को भी सरल रखा गया है। अब मात्र 100 रुपए के शुल्क पर यह प्रक्रिया पूरी की जा सकेगी, जिससे छोटे व्यापारियों पर आर्थिक बोझ कम होगा।
टर्नओवर सीमा बढ़ाकर दी बड़ी राहत
खाद्य सामग्री बेचने वाले दुकानदारों और फैक्ट्री संचालकों के लिए भी बड़ा बदलाव किया गया है। पहले जहां स्टेट और सेंट्रल लाइसेंस के लिए 12 लाख से 20 करोड़ रुपए की सीमा थी, उसे बढ़ाकर 1.5 करोड़ से 50 करोड़ रुपए कर दिया गया है। इससे अधिक व्यवसायी सरल प्रक्रिया के तहत लाइसेंस प्राप्त कर सकेंगे।
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व्यापार संगठनों ने जताया संतोष
व्यापार संगठनों ने इस फैसले का स्वागत किया है। उद्योग जगत से जुड़े प्रतिनिधियों का कहना है कि लंबे समय से इस तरह के संशोधन की मांग की जा रही थी, जिससे छोटे और मध्यम व्यापारियों को राहत मिल सके।
आजीवन वैधता की शर्तें
हालांकि, लाइसेंस को आसान बनाने के साथ कुछ शर्तें भी लागू की गई हैं—
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सालाना फीस का भुगतान समय पर करना अनिवार्य होगा
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हर वर्ष 31 मई तक वार्षिक रिटर्न दाखिल करना होगा
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समय पर फीस या रिटर्न जमा नहीं करने पर लाइसेंस निलंबित हो सकता है
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अधिकारी बिना पूर्व सूचना के निरीक्षण कर सकेंगे
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नियमों के उल्लंघन पर लाइसेंस रद्द भी किया जा सकता है
पहले क्या थी स्थिति
पहले स्ट्रीट वेंडर्स को हर साल रजिस्ट्रेशन नवीनीकरण कराना पड़ता था, जिससे समय और पैसे दोनों की परेशानी होती थी। साथ ही नगर निकायों में अलग से पंजीकरण की प्रक्रिया के कारण दोहरी कागजी कार्यवाही करनी पड़ती थी।
नए नियमों से खासकर छोटे शहरों और कस्बों में काम कर रहे वेंडर्स को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। इससे उनके व्यवसाय को बढ़ावा मिलेगा और अनावश्यक प्रशासनिक झंझट भी कम होंगे।

