बीकानेर। राजस्थान में कम छात्र संख्या वाले स्कूलों को लेकर शिक्षा विभाग ने बड़ा कदम उठाने की तैयारी शुरू कर दी है। राज्य के प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में जहां छात्रों की संख्या बेहद कम या शून्य है, ऐसे स्कूलों को नजदीकी स्कूलों में मर्ज किया जाएगा।
इस संबंध में प्रारंभिक शिक्षा निदेशक ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को 23 मार्च 2026 को जयपुर में बैठक के लिए बुलाया है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने-अपने जिलों से उन स्कूलों की सूची लेकर आएं, जहां प्राथमिक स्तर पर 15 से कम और उच्च प्राथमिक स्तर पर 25 से कम छात्र हैं। साथ ही ऐसे नजदीकी स्कूलों की जानकारी भी मांगी गई है, जहां इन स्कूलों का विलय किया जा सकता है।
विभाग के अनुसार राज्य में एक तरफ कई स्कूलों में छात्रों की संख्या बहुत कम है, वहीं दूसरी ओर कुछ स्कूलों में क्षमता से अधिक विद्यार्थी हैं और वहां शिक्षकों की कमी बनी हुई है। ऐसे में कम छात्र संख्या वाले स्कूलों को पास के स्कूलों में मर्ज कर विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराने की योजना बनाई जा रही है।
इस प्रक्रिया से मर्ज होने वाले स्कूलों के शिक्षकों को उन स्कूलों में भेजा जाएगा, जहां शिक्षकों की आवश्यकता अधिक है। निदेशालय की ओर से ऐसे स्कूलों की सूची भी जारी की जा चुकी है। जानकारी के अनुसार करीब 7000 स्कूल ऐसे चिन्हित किए गए हैं, जहां छात्र संख्या निर्धारित सीमा से कम है।
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पिछले दो वर्षों में भी विभाग ने इसी तरह की कार्रवाई करते हुए 405 स्कूलों का विलय नजदीकी स्कूलों में किया था।
वहीं, राजस्थान प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षक संघ का कहना है कि हर साल प्रवेश प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही मर्ज होने वाले स्कूलों और वहां के स्टाफ को लेकर स्पष्ट कैलेंडर जारी किया जाना चाहिए। संघ का तर्क है कि इस तरह की स्थायी व्यवस्था नहीं होने के कारण पहले मर्ज किए गए स्कूलों का अतिरिक्त स्टाफ लंबे समय तक बिना कार्य के वेतन ले रहा है।
शिक्षा विभाग का यह कदम राज्य में संसाधनों के बेहतर उपयोग और शिक्षा व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

