महिला दिवस के मौके पर उठा राजनीतिक विवाद
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार पर तीखा हमला बोला। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के कथित अपमान को लेकर उन्होंने कहा कि यह सिर्फ राष्ट्रपति पद का नहीं बल्कि एक महिला और आदिवासी समाज के सम्मान का भी सवाल है। उन्होंने आरोप लगाया कि टीएमसी सरकार ने जिस तरह से राष्ट्रपति के कार्यक्रम से दूरी बनाई, उसे देश कभी माफ नहीं करेगा।
प्रधानमंत्री ने कहा कि जब पूरा देश महिला दिवस मना रहा है, उसी समय एक महिला राष्ट्रपति के साथ इस तरह का व्यवहार होना दुर्भाग्यपूर्ण है। उनके अनुसार यह घटना देश की नारी शक्ति और आदिवासी समाज की गरिमा से भी जुड़ी हुई है।
महिलाओं के योगदान की भी की सराहना
प्रधानमंत्री मोदी ने महिला दिवस के अवसर पर देश की महिलाओं को बधाई भी दी। उन्होंने कहा कि आज भारत की महिलाएं राजनीति, प्रशासन, विज्ञान, खेल और समाज सेवा जैसे कई क्षेत्रों में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल कर रही हैं और राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
उन्होंने कहा कि देश की नारी शक्ति के योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता और सरकार महिलाओं को आगे बढ़ाने के लिए लगातार काम कर रही है।
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कैसे शुरू हुआ पूरा विवाद
पश्चिम बंगाल में यह विवाद उस समय शुरू हुआ जब 9वें इंटरनेशनल संथाली कॉन्क्लेव के आयोजन स्थल में अचानक बदलाव कर दिया गया। पहले यह कार्यक्रम बिधाननगर में आयोजित होना था, लेकिन बाद में इसे सिलीगुड़ी के पास बागडोगरा एयरपोर्ट के नजदीक एक छोटे स्थान पर शिफ्ट कर दिया गया।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए बंगाल पहुंची थीं। कार्यक्रम में राज्य सरकार के कई मंत्री और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की अनुपस्थिति को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा शुरू हो गई। बताया गया कि स्थान बदलने के कारण कई स्थानीय लोग कार्यक्रम में शामिल नहीं हो पाए।
राष्ट्रपति ने भी जताई थी हैरानी
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा था कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी उनके लिए छोटी बहन की तरह हैं। उन्होंने आश्चर्य जताते हुए कहा कि वे कार्यक्रम में क्यों नहीं आईं। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि वह स्वयं भी बंगाल की बेटी हैं और राज्य से उनका विशेष जुड़ाव है।
टीएमसी ने दिया अपना पक्ष
विवाद बढ़ने के बाद तृणमूल कांग्रेस ने राष्ट्रपति के बयान पर आपत्ति जताई और कहा कि पश्चिम बंगाल सरकार आदिवासी समुदाय के विकास के लिए लगातार काम कर रही है। पार्टी ने विभिन्न योजनाओं और आंकड़ों का हवाला देते हुए दावा किया कि राज्य में अनुसूचित जनजाति समुदाय के लिए कई महत्वपूर्ण योजनाएं लागू की गई हैं।
टीएमसी ने कहा कि लक्ष्मीर भंडार योजना के तहत एसटी महिलाओं को मिलने वाली मासिक आर्थिक सहायता बढ़ाई गई है। इसके अलावा सिखश्री स्कॉलरशिप और जय जोहार पेंशन योजना के माध्यम से आदिवासी छात्रों और परिवारों को आर्थिक सहायता दी जा रही है।

