साइबर ठगी के खिलाफ देशभर में सख्त अभियान
देशभर में बढ़ते साइबर अपराधों को देखते हुए अब पुलिस और केंद्रीय एजेंसियां पहले से अधिक सक्रिय हो गई हैं। साइबर फ्रॉड से निपटने के लिए सरकार ने कई नई तकनीकी व्यवस्थाएं लागू की हैं, जिनके जरिए अब ठगों पर तेजी से कार्रवाई हो रही है और पीड़ितों की रकम भी बचाई जा रही है।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने फरवरी 2026 में आयोजित CBI-I4C राष्ट्रीय सम्मेलन में कहा कि साइबर अपराध अब केवल आर्थिक नुकसान का मामला नहीं रह गया है, बल्कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मुद्दा बन चुका है। इसी को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने बहुआयामी रणनीति तैयार की है, जिसमें तकनीकी जांच, जन जागरूकता, साइबर हाइजीन और रीयल-टाइम मॉनिटरिंग शामिल है।
e-Zero FIR से तुरंत शुरू होती है कार्रवाई
साइबर अपराधों के खिलाफ सबसे प्रभावी कदमों में से एक e-Zero FIR व्यवस्था है। दिल्ली में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू हुई यह प्रणाली अब राजस्थान, मध्य प्रदेश, गोवा, चंडीगढ़ और उत्तराखंड जैसे राज्यों में लागू की जा चुकी है।
इस व्यवस्था के तहत यदि किसी व्यक्ति के साथ एक लाख या उससे अधिक की साइबर ठगी होती है, तो वह 1930 हेल्पलाइन या cybercrime.gov.in पोर्टल पर शिकायत दर्ज करा सकता है। शिकायत दर्ज होते ही स्वतः जीरो एफआईआर दर्ज हो जाती है और पुलिस बिना क्षेत्राधिकार की बाधा के तुरंत जांच शुरू कर सकती है।
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‘गोल्डन ऑवर’ में पैसा वापस मिलने की उम्मीद
नई प्रणाली के कारण अब साइबर ठगी के मामलों में शुरुआती घंटों में ही कार्रवाई संभव हो पाती है। इसे ‘गोल्डन ऑवर’ कहा जाता है। इस दौरान ठगों के बैंक खातों को तुरंत फ्रीज किया जा सकता है, जिससे पीड़ितों की रकम वापस मिलने की संभावना काफी बढ़ जाती है।
राजस्थान हाईकोर्ट ने भी दिसंबर 2025 में डिजिटल ठगी के मामलों पर सख्त निर्देश दिए थे। इसके तहत राज्य स्तर पर साइबर क्राइम कंट्रोल सेंटर स्थापित करने और ऑटो एफआईआर की सुविधा शुरू करने का आदेश दिया गया था। यह व्यवस्था फरवरी 2026 से राज्य में लागू हो चुकी है।
I4C के जरिए हजारों करोड़ की रकम सुरक्षित
इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) की रिपोर्ट के अनुसार 2021 से 2025 के बीच देशभर में 23.6 लाख से अधिक साइबर ठगी की शिकायतें दर्ज हुईं। इनमें से करीब 20 हजार करोड़ रुपए की ठगी की कोशिश की गई थी, लेकिन पुलिस और एजेंसियों की त्वरित कार्रवाई से 8,189 करोड़ रुपए फ्रीज या वापस कराए जा सके।
नए ‘प्रतिबिंब’ मॉड्यूल के जरिए अपराधियों की लोकेशन, सिम कार्ड और इस्तेमाल किए जा रहे डिजिटल नेटवर्क को ट्रैक करना आसान हो गया है। इस तकनीक की मदद से अब तक 20 हजार से अधिक गिरफ्तारियां हो चुकी हैं और लाखों मामलों की जांच में सहायता मिली है।
राजस्थान में भी बड़ी कार्रवाई
राजस्थान में वर्ष 2025 के दौरान साइबर ठगी से लगभग 768 करोड़ रुपए के नुकसान की शिकायतें सामने आई थीं। हालांकि पुलिस की त्वरित कार्रवाई से लगभग 179 करोड़ रुपए की राशि फ्रीज या वापस कराई गई।
फरवरी 2026 में राजस्थान पुलिस ने “ऑपरेशन शटरडाउन” चलाकर संगठित साइबर ठगी गिरोहों पर बड़ी कार्रवाई की। इस अभियान के दौरान 51 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया और उनकी करोड़ों रुपए की संपत्ति जब्त की गई। जांच में यह भी सामने आया कि कुछ गिरोह सरकारी योजनाओं, खासकर पीएम किसान जैसी योजनाओं में भी सेंध लगाने की कोशिश कर रहे थे।
नए प्रकार के साइबर फ्रॉड को लेकर चेतावनी
राजस्थान पुलिस ने हाल ही में टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (TRAI) के नाम पर किए जा रहे फर्जी कॉल और मैसेज को लेकर भी एडवाइजरी जारी की है। पुलिस ने लोगों से सतर्क रहने और संदिग्ध कॉल, लिंक या ओटीपी साझा करने से बचने की अपील की है।
विशेषज्ञों का मानना है कि नई तकनीकों और त्वरित कार्रवाई की व्यवस्था के कारण अब साइबर अपराधियों पर लगाम लगाने में मदद मिलेगी।

