भ्रामक सोशल मीडिया पोस्ट पर हाईकोर्ट की सख्ती
राजस्थान हाईकोर्ट ने सोशल मीडिया पर फैल रही भ्रामक जानकारी को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए टेक कंपनी मेटा को एक विवादित पोस्ट तुरंत हटाने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने यह आदेश एक नाबालिग बच्ची की याचिका पर सुनवाई करते हुए जारी किया। कोर्ट का मानना है कि इस पोस्ट के कारण बच्ची और उसकी मां की सुरक्षा पर गंभीर खतरा पैदा हो गया था।
यह मामला डिजिटल प्लेटफॉर्म पर फैलने वाली गलत जानकारी और उससे उत्पन्न होने वाले खतरों को लेकर भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सात साल की बच्ची ने लगाई याचिका
मामले की सुनवाई न्यायाधीश अनूप कुमार ढंड की अदालत में हुई। याचिका सात वर्षीय बच्ची की ओर से दायर की गई थी, जो अपनी मां के साथ रह रही है। याचिका में बताया गया कि सोशल मीडिया पर बच्ची के दादा-दादी के नाम से एक पोस्ट वायरल की गई, जिसमें दावा किया गया कि बच्ची अहमदाबाद से लापता हो गई है।
पोस्ट में यह भी लिखा गया था कि जो कोई भी बच्ची को ढूंढकर लाएगा, उसे एक लाख रुपये का इनाम दिया जाएगा। इस भ्रामक जानकारी के कारण कई लोग इनाम के लालच में बच्ची के घर पहुंचने लगे, जिससे परिवार में भय और असुरक्षा का माहौल बन गया।
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अदालत में रखे गए पक्ष
बच्ची की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता राजेश कुमार ने अदालत को बताया कि बच्ची के माता-पिता का विवाह वर्ष 2010 में हुआ था। वर्ष 2015 में उसके पिता का निधन हो गया, जिसके बाद से वह अपनी मां के साथ रह रही है।
दूसरी ओर, बच्ची के दादा ने अदालत में कहा कि उन्होंने ऐसी कोई पोस्ट सोशल मीडिया पर साझा नहीं की है। उन्होंने बताया कि उनकी पत्नी का निधन हो चुका है और उनकी उम्र लगभग 70 वर्ष है।
अदालत ने सुरक्षा को माना सर्वोपरि
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने कहा कि पोस्ट किसने डाली, यह जांच का विषय हो सकता है, लेकिन इससे उत्पन्न खतरे को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी भी व्यक्ति, खासकर नाबालिग की निजता और सुरक्षा के साथ डिजिटल माध्यमों पर इस तरह का खिलवाड़ स्वीकार नहीं किया जाएगा।
मेटा को दिए सख्त निर्देश
मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने मेटा कंपनी को पक्षकार बनाते हुए निर्देश दिया कि फेसबुक और इंस्टाग्राम पर मौजूद उस भ्रामक पोस्ट तथा उससे जुड़ी सभी लिंक और सामग्री को तुरंत ब्लॉक या डिलीट किया जाए।
फेक न्यूज पर सख्त संदेश
राजस्थान हाईकोर्ट के इस फैसले को सोशल मीडिया पर फैलने वाली फेक न्यूज के खिलाफ एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि बिना सत्यापन के किसी भी जानकारी को साझा करना कई बार गंभीर परिणाम पैदा कर सकता है।
फिलहाल पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि यह पोस्ट सबसे पहले किसने और किस उद्देश्य से सोशल मीडिया पर डाली थी।

