Karni Industrial Area में प्रदूषित पानी की समस्या को लेकर अब प्रशासन सख्त रुख अपनाने की तैयारी में है। यहां स्थित 29 औद्योगिक इकाइयों द्वारा निकलने वाले प्रदूषित जल के मामले में कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू हो गई है।
इस संबंध में Rajasthan State Pollution Control Board ने अपनी जांच रिपोर्ट प्रस्तुत कर दी है, जबकि Central Ground Water Board ने जिला प्रशासन से एक्शन टेकन रिपोर्ट मांगी है।
करणी औद्योगिक क्षेत्र प्रथम, द्वितीय और एसजीसी (स्प्रीट ग्रोथ सेंटर) से निकलने वाला प्रदूषित पानी लंबे समय से करणी विस्तार के करीब 62 बीघा क्षेत्र में जमा है। इस समस्या के समाधान के लिए National Green Tribunal के निर्देश के बाद राज्य के पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग ने राज्य स्तरीय पर्यावरण निगरानी एवं प्रत्युत्तर समिति का गठन किया है।
समिति की पहली बैठक के मिनट्स जारी किए जा चुके हैं, जिनमें औद्योगिक क्षेत्र के प्रबंधन और प्रदूषण फैलाने वाली इकाइयों के खिलाफ सख्त कदम उठाने का फैसला लिया गया है। पर्यावरण स्वीकृति के तहत उद्योगों के लिए जीरो लिक्विड डिस्चार्ज प्रणाली अनिवार्य कर दी गई है। यदि छह माह के भीतर सीईटीपी (कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट) स्थापित नहीं किया गया तो इसे नियमों का निरंतर उल्लंघन माना जाएगा।
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प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि कई उद्योग बिना उपचार के अपशिष्ट जल का निस्तारण कर रहे हैं। वहीं, कुछ इकाइयों में लगे व्यक्तिगत ईटीपी (एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट) भी पर्याप्त रूप से प्रभावी नहीं हैं।
राज्य स्तरीय समिति ने आवश्यकता पड़ने पर ऐसे उद्योगों को बंद करने के निर्देश भी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को दिए हैं, जिनके ईटीपी सही तरीके से काम नहीं कर रहे। करणी औद्योगिक क्षेत्र की 29 इकाइयों से रोजाना निकलने वाले प्रदूषित पानी को लेकर उद्योगों में चिंता का माहौल बना हुआ है।

