बीकानेर की होली सिर्फ रंगों तक सीमित नहीं है, बल्कि यहां की परंपराएं इसे बेहद खास बनाती हैं। होलाष्टक के दौरान जहां चंग की थाप, रम्मतों का मंचन और डोलची की मस्ती देखने को मिलती है, वहीं धुलंडी के दिन एक अनोखी परंपरा लोगों को आकर्षित करती है।
इस दिन शहर में विष्णु रूपी दूल्हे की बारात निकाली जाती है, जो रियासतकाल से चली आ रही एक ऐतिहासिक परंपरा है। मांगलिक गीतों और उत्सव के माहौल में यह बारात किसी वास्तविक विवाह जैसी प्रतीत होती है, लेकिन इसमें कोई शादी नहीं होती।
यह परंपरा पुष्करणा समाज की हर्ष जाति से जुड़ी है, जिसमें एक कुंवारे युवक को दूल्हा बनाकर बारात निकाली जाती है। परिवारजन, रिश्तेदार और समाज के लोग बाराती बनते हैं, जिससे पूरे शहर में उत्सव जैसा माहौल बन जाता है। इस वर्ष यह विशेष बारात 3 मार्च को निकाली जाएगी।
बारात निर्धारित आठ घरों तक जाती है, जहां हर घर के बाहर महिलाएं पारंपरिक ‘पोखने’ की रस्म निभाती हैं और विवाह गीत गाती हैं। बारातियों का स्वागत किया जाता है और उन्हें नारियल व नकद भेंट दी जाती है।
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करीब तीन सौ साल पुरानी यह परंपरा सामाजिक सौहार्द, आपसी प्रेम और एकता का प्रतीक मानी जाती है। बीकानेरवासी पूरे साल इस खास आयोजन का इंतजार करते हैं, जो होली के रंगों में सांस्कृतिक विरासत की अनूठी छटा बिखेरता है।

