जयपुर। राजस्थान विधानसभा के हालिया सत्र में युवाओं के घर से भागकर प्रेम विवाह करने और लिव-इन रिलेशनशिप में रहने के मुद्दे ने राजनीतिक और सामाजिक बहस को तेज कर दिया है। आहोर से भाजपा विधायक छगन सिंह राजपुरोहित ने इस विषय को शून्य काल में उठाते हुए सरकार से स्पष्ट नीति और कानून बनाने की मांग की है।
सामाजिक संरचना पर असर का तर्क
विधायक का कहना है कि बदलते सामाजिक परिवेश में युवाओं के निर्णय पारिवारिक सहमति से अलग होते जा रहे हैं। उनका मानना है कि बिना अभिभावकों की अनुमति के लव मैरिज या live-in relationship में रहने की प्रवृत्ति पारिवारिक ताने-बाने को कमजोर कर रही है। कई मामलों में यह स्थिति परिवारों के लिए मान-सम्मान का प्रश्न बन जाती है, जिससे तनाव और टकराव बढ़ता है।
उन्होंने यह भी कहा कि भावनात्मक आवेश में लिया गया निर्णय कई बार युवाओं के भविष्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है। कम उम्र में लिए गए ऐसे फैसलों के कारण शिक्षा, करियर और सामाजिक सुरक्षा प्रभावित हो सकती है।
पढ़ाई और सुरक्षा पर चिंता
विधानसभा में अपने वक्तव्य के दौरान विधायक ने कहा कि कुछ घटनाओं में परिजन असुरक्षा और सामाजिक दबाव के चलते बच्चों की पढ़ाई तक रुकवा देते हैं। कई मामलों में युवती के घर से जाने पर गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई जाती है, जिससे पुलिस और परिवार दोनों कानूनी उलझनों में फंस जाते हैं।
- Advertisement -
उनके अनुसार यह केवल व्यक्तिगत मामला नहीं, बल्कि व्यापक सामाजिक चिंता का विषय है। युवाओं की मानसिक स्थिरता, सुरक्षा और शिक्षा पर पड़ने वाले प्रभावों को गंभीरता से समझने की आवश्यकता है।
18 से 25 वर्ष आयु वर्ग के लिए प्रस्ताव
छगन सिंह राजपुरोहित ने सुझाव दिया कि 18 से 25 वर्ष की आयु के युवक-युवतियों के प्रेम विवाह और लिव-इन रिलेशनशिप के मामलों में माता-पिता की अनिवार्य सहमति को लेकर कानून पर विचार किया जाना चाहिए। उनका तर्क है कि इस आयु वर्ग में कई निर्णय भावनात्मक आधार पर लिए जाते हैं, जो आगे चलकर कानूनी और सामाजिक जटिलताएं पैदा कर सकते हैं।
उन्होंने राज्य सरकार से व्यापक विमर्श कर ऐसा अधिनियम लाने की मांग की, जिससे अभिभावकों की भूमिका मजबूत हो और पारिवारिक मूल्यों का संरक्षण किया जा सके।
कानूनी और सामाजिक बहस की संभावना
यह प्रस्ताव आने वाले समय में संवैधानिक अधिकारों, व्यक्तिगत स्वतंत्रता और पारिवारिक मूल्यों के बीच संतुलन को लेकर नई बहस को जन्म दे सकता है। एक ओर बालिग व्यक्तियों को अपने जीवनसाथी चुनने की स्वतंत्रता का अधिकार है, वहीं दूसरी ओर सामाजिक संरचना और पारिवारिक सहमति का प्रश्न भी महत्वपूर्ण माना जाता है।
राजस्थान की राजनीति में यह मुद्दा अब केवल सामाजिक चर्चा तक सीमित नहीं है, बल्कि नीति निर्माण के स्तर पर भी विचार का विषय बनता दिखाई दे रहा है।

