बीकानेर। जिले के खारा गांव में वायु प्रदूषण को लेकर स्थिति चिंताजनक होती जा रही है। बिगड़ती हवा की गुणवत्ता का असर अब सीधे बच्चों की पढ़ाई पर पड़ने लगा है। ग्रामीणों का आरोप है कि जहरीली हवा और धूलकणों की अधिकता के कारण बच्चों का स्वास्थ्य प्रभावित हो रहा है, जिसके चलते कई अभिभावकों ने अपने बच्चों को स्कूल भेजना बंद कर दिया है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) की केंद्रीय क्षेत्र पीठ, भोपाल ने स्वतः संज्ञान लिया है। पीठ में न्यायमूर्ति श्यो कुमार सिंह (न्यायिक सदस्य) और विशेषज्ञ सदस्य सुधीर कुमार चतुर्वेदी शामिल रहे। प्रारंभिक सुनवाई में अधिकरण ने माना कि यह मामला जनस्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण से सीधे तौर पर जुड़ा है, इसलिए विस्तृत जांच अनिवार्य है।
राज्य सरकार और विभागों को नोटिस
एनजीटी ने राजस्थान सरकार, राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, जिला शिक्षा अधिकारी तथा मुख्य सचिव (पर्यावरण) को नोटिस जारी कर छह सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है। अधिकरण ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि सभी उत्तरदाता अपना पक्ष सर्चेबल पीडीएफ प्रारूप में प्रस्तुत करें।
संयुक्त समिति करेगी मौके का निरीक्षण
मामले की वस्तुस्थिति जानने के लिए एनजीटी ने संयुक्त समिति के गठन के आदेश दिए हैं। इस समिति में जिला कलेक्टर और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के प्रतिनिधि शामिल होंगे। समिति को खारा गांव का दौरा कर वायु प्रदूषण के स्रोतों की पहचान, उसके स्वास्थ्य पर प्रभाव और निवारण उपायों पर विस्तृत रिपोर्ट तैयार करनी होगी।
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ग्रामीणों की चिंता बढ़ी
ग्रामीणों का कहना है कि पिछले कुछ समय से गांव में धूल और प्रदूषण का स्तर बढ़ गया है। बच्चों में खांसी, आंखों में जलन और सांस संबंधी दिक्कतें सामने आ रही हैं। अभिभावकों ने प्रशासन से तत्काल प्रभाव से ठोस कदम उठाने की मांग की है, ताकि बच्चों की पढ़ाई और स्वास्थ्य दोनों सुरक्षित रह सकें।
आगे की सुनवाई पर नजर
एनजीटी द्वारा मांगी गई रिपोर्ट और जवाब के आधार पर अगली सुनवाई में आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। फिलहाल गांव में हालात को लेकर चिंता का माहौल है और सभी की नजर प्रशासनिक कदमों पर टिकी है।

