बीकानेर। संभाग के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल पीबीएम में एक बार फिर भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। बीकानेर पश्चिम से विधायक जेठानंद व्यास ने सार्वजनिक मंच से अस्पताल प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए, जिसके बाद चिकित्सा महकमे में हलचल मच गई।
यह बयान पीबीएम अस्पताल परिसर में भामाशाह परिवार द्वारा निर्मित कॉटेज के लोकार्पण कार्यक्रम के दौरान दिया गया। विधायक ने संविदा नियुक्तियों और जनता क्लिनिक संचालन में कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाते हुए कई सवाल खड़े किए।
संविदा नौकरी के नाम पर लाखों की वसूली का आरोप
विधायक व्यास ने आरोप लगाया कि पीबीएम अस्पताल में ठेके पर कर्मचारियों की भर्ती के नाम पर प्रति व्यक्ति एक-एक लाख रुपये तक की मांग की जा रही है। उन्होंने कहा कि नौकरी दिलाने के लिए खुलेआम पैसों की डील की जा रही है, जो गंभीर भ्रष्टाचार की ओर इशारा करती है।
उनका दावा है कि यह पूरा खेल संविदा नियुक्ति प्रक्रिया के तहत चल रहा है और जरूरतमंद अभ्यर्थियों का आर्थिक शोषण किया जा रहा है।
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जनता क्लिनिक कर्मचारियों से मासिक वसूली
व्यास ने यह भी आरोप लगाया कि पीबीएम के अंतर्गत संचालित जनता क्लिनिक में कार्यरत कर्मचारियों से हर महीने 500 से 3000 रुपये तक की वसूली की जा रही है। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों पर दबाव बनाकर यह राशि ली जा रही है और यह सिलसिला लंबे समय से जारी है।
इन आरोपों ने जनता क्लिनिक की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
500 नियुक्तियों का दावा, नियुक्त हुए सिर्फ 200?
विधायक ने संविदा कर्मचारियों की भर्ती करने वाली निजी एजेंसियों पर भी निशाना साधा। उनके अनुसार अस्पताल में 500 कर्मचारियों की नियुक्ति का दावा किया गया, लेकिन वास्तव में केवल लगभग 200 कर्मचारियों को ही तैनात किया गया।
उन्होंने इसे भर्ती प्रक्रिया में बड़ा घोटाला बताते हुए कहा कि अस्पताल प्रबंधन और संबंधित एजेंसियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
प्रशासन की प्रतिक्रिया
कार्यक्रम में मौजूद मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. सुरेंद्र वर्मा ने आरोपों पर सार्वजनिक रूप से कोई टिप्पणी नहीं की। वहीं अस्पताल अधीक्षक डॉ. बी.सी. घिया ने कहा कि विधायक द्वारा लगाए गए आरोपों की जांच करवाई जाएगी और तथ्य सामने आने के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
अब पूरे मामले पर प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर नजर बनी हुई है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह मामला चिकित्सा व्यवस्था में बड़े सुधार की मांग को और तेज कर सकता है।

