बीकानेर में खेजड़ी बचाओ महापड़ाव आठवें दिन भी जारी
बीकानेर के पब्लिक पार्क स्थित धरना स्थल पर चल रहा खेजड़ी बचाओ महापड़ाव सोमवार को आठवें दिन भी जारी रहा। अन्य दिनों की तुलना में आज आंदोलन स्थल पर ज्यादा चहल-पहल देखने को मिली। प्रदेश के अलग-अलग जिलों से पहुंचे पर्यावरण प्रेमियों, महिलाओं और बच्चों की भागीदारी ने आंदोलन को और मजबूती दी है।
आंदोलनकारियों की निगाहें अब संत समाज के फैसले पर टिकी हैं। रविवार देर रात जयपुर में मुख्यमंत्री से हुई वार्ता के बाद संतों का प्रतिनिधिमंडल सरकार का पक्ष मंच से रखने वाला है, जिसका सभी को इंतजार है।
जयपुर में सीएम से लंबी बातचीत, समाधान की उम्मीद
आंदोलन के सातवें दिन संत समाज के 11 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल को जयपुर बुलाया गया था। मुकाम पीठाधीश्वर स्वामी रामानंद महाराज सहित विभिन्न संतों और महंतों ने मुख्यमंत्री से देर रात तक चर्चा की। इस संवाद के बाद आंदोलन और सरकार के बीच चल रहे गतिरोध के टूटने की संभावना जताई जा रही है।
हालांकि सोमवार दोपहर तक संत महापड़ाव स्थल पर नहीं पहुंचे, जिससे आंदोलनकारियों में असमंजस की स्थिति बनी रही।
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कटाई की शिकायतें जारी, भरोसे पर सवाल
राज्य मंत्री द्वारा खेजड़ी कटाई रोकने के आश्वासन के बावजूद कई इलाकों से पेड़ों की कटाई की शिकायतें सामने आ रही हैं। यही कारण है कि आंदोलनकारियों का आक्रोश कम होने का नाम नहीं ले रहा। पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि जब तक जमीन पर कटाई पूरी तरह नहीं रुकती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
महिलाओं की कलश यात्रा और बच्चों की भागीदारी
सोमवार को बीकानेर शहर में विशाल कलश यात्रा निकाली जाएगी। यह यात्रा महापड़ाव स्थल से शुरू होकर केईएम रोड होते हुए कोटगेट तक पहुंचेगी। इसमें सभी वर्गों की महिलाएं शामिल होंगी और खेजड़ी संरक्षण व सख्त कानून की मांग को लेकर संदेश दिया जाएगा।
धरना स्थल पर बच्चों और महिलाओं की मौजूदगी से माहौल जीवंत बना रहा। भजन-कीर्तन, प्रवचन और कविताओं के माध्यम से खेजड़ी संरक्षण का संदेश दिया गया।
अमावस्या मेले में बड़ा फैसला संभव
उधर, मुकाम धाम में सात दिन बाद लगने वाले अमावस्या मेले को लेकर भी हलचल तेज है। हर साल लाखों श्रद्धालु इस मेले में पहुंचते हैं। यदि सरकार की ओर से ठोस आश्वासन नहीं मिला तो संत समाज इस मेले में आंदोलन को लेकर बड़ा निर्णय ले सकता है।
क्रमिक अनशन से बढ़ा दबाव
पर्यावरण संघर्ष समिति की ओर से 151 लोगों को क्रमिक अनशन पर बैठाया गया है। यह अनशन 24 घंटे के लिए जारी रहेगा। आंदोलनकारियों का कहना है कि खेजड़ी केवल पेड़ नहीं, बल्कि उनकी आस्था, संस्कृति और पर्यावरण का आधार है।

