बीकानेर। साइबर अपराधियों ने बीकानेर के करणी नगर क्षेत्र में एक बुजुर्ग महिला और उनकी बहू को भय का शिकार बनाकर लाखों रुपये की ठगी को अंजाम दिया। ठगों ने खुद को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) का अधिकारी बताकर महिलाओं को तीन दिन तक तथाकथित “डिजिटल अरेस्ट” में रखा और फर्जी सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का हवाला देकर रकम वसूल ली।
फर्जी अरेस्ट वारंट से बनाया दबाव
घटना 21 से 23 जनवरी के बीच की बताई जा रही है। ठगों ने महिलाओं को व्हाट्सएप कॉल कर खुद को एनआईए अधिकारी बताया और दावा किया कि उनके खिलाफ गंभीर मामले दर्ज हैं। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट के नाम से बनाए गए फर्जी अरेस्ट वारंट और आदेश भेजे गए, जिससे महिलाएं भयभीत हो गईं।
वीडियो कॉल पर दिखाया नकली एनआईए कार्यालय
विश्वास दिलाने के लिए ठगों ने वीडियो कॉल के जरिए एक फर्जी एनआईए ऑफिस भी दिखाया। वीडियो में दीवार पर एनआईए का लोगो लगा हुआ था और आसपास कुछ लोग अधिकारी की भूमिका निभाते नजर आए। इस पूरे घटनाक्रम से महिलाएं इतनी डर गईं कि उन्होंने अपने बच्चों को भी कमरे में आने से रोक दिया और लगातार ठगों के निर्देशों का पालन करती रहीं।
48 लाख रुपये ट्रांसफर करवाए
ठगों ने शुरुआत में 40 लाख रुपये की मांग की, जिसे बाद में बढ़ाकर 48 लाख रुपये कर दिया। जब महिलाओं ने ऑनलाइन ट्रांसफर करने में असमर्थता जताई, तो ठगों ने उन्हें बैंक जाकर रकम ट्रांसफर करने की अनुमति दी। हालांकि, सख्त चेतावनी दी गई कि वे सीधे बैंक जाएं, किसी से बात न करें और बताए गए खातों में ही पैसे जमा कराएं।
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दोनों महिलाएं केईएम रोड स्थित एसबीआई शाखा पहुंचीं। वहां बुजुर्ग महिला ने अपनी दो फिक्स्ड डिपॉजिट तुड़वाकर रकम सेविंग अकाउंट में डलवाई और फिर आरटीजीएस के जरिए दो अलग-अलग खातों में कुल 48 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए।
साइबर थाने में मामला दर्ज
साइबर थाना प्रभारी रमेश सर्वटा ने बताया कि पीड़िताओं की शिकायत पर अज्ञात साइबर ठगों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस बैंक खातों और डिजिटल लेनदेन से जुड़े साक्ष्यों के आधार पर जांच कर रही है।
पुलिस की अपील
पुलिस ने आमजन से अपील की है कि किसी भी अनजान कॉल पर भरोसा न करें। किसी भी एजेंसी द्वारा डिजिटल अरेस्ट या फोन पर गिरफ्तारी की प्रक्रिया नहीं होती। ऐसे मामलों में तुरंत साइबर हेल्पलाइन या नजदीकी साइबर थाने को सूचना दें, ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके।

