पोकरण विधानसभा क्षेत्र में वर्षों से जारी जल संकट के बीच हेलीबोर्न सर्वे ने भूजल उपलब्धता के स्पष्ट संकेत दिए हैं। यह सर्वे वर्ष 2021 में केंद्रीय भूजल बोर्ड और एनजीआरआई के सहयोग से किया गया था, और अब इसकी अंतिम रिपोर्ट जिला कलक्टर, जैसलमेर को प्रेषित कर दी गई है।
रिपोर्ट के अनुसार पोकरण क्षेत्र के कुल 64 स्थानों पर भूजल मिलने की संभावना है। इनमें से 55 ऐसे स्थान हैं, जहां पहले कभी पानी मिलने की पुष्टि नहीं हुई थी। यह परिणाम उन गांवों के लिए नई उम्मीद जगाता है, जहां वर्षों से पेयजल की गंभीर समस्या रही है।
वरिष्ठ भूजल वैज्ञानिक डॉ. नारायण दास इणखिया के अनुसार, पोकरण तहसील का अधिकांश क्षेत्र लंबे समय से अल्प जल वाला माना जाता रहा है। हेलीबोर्न सर्वे ने पारंपरिक मान्यताओं को चुनौती देते हुए कई ऐसे गांवों में भी भूजल की संभावना दिखाई है, जहां पहले पानी की उम्मीद नहीं की जाती थी।
सर्वे में फलसूंड से छायन और धुडसर से राजगढ़ तक के लगभग 15 हजार वर्ग किलोमीटर क्षेत्र का अध्ययन किया गया। आधुनिक हेलीकॉप्टर आधारित तकनीकों और जियोफिजिकल एवं इलेक्ट्रोमैग्नेटिक तरीकों की मदद से भूजल स्रोतों और पुनर्भरण योग्य क्षेत्रों की पहचान की गई।
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विशेषज्ञों का कहना है कि भले ही पोकरण और भनियाणा में इंदिरा गांधी नहर परियोजना के जरिए पेयजल उपलब्ध है, लेकिन चिन्हित स्थलों पर नलकूप बनाना भविष्य में आपातकालीन परिस्थितियों में स्थानीय आबादी के लिए जीवनरेखा साबित हो सकता है। सर्वे की सबसे बड़ी उपलब्धि फलसूंड क्षेत्र में भूजल मिलने की संभावना का संकेत है, जो क्षेत्र की जल सुरक्षा को मजबूत करने में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

