हल्दीराम मूलचंद हार्ट हॉस्पिटल में 13 और 14 जनवरी को आयोजित विशेष दो दिवसीय हृदय रोग शिविर में जन्मजात हृदय रोग से पीड़ित 11 मरीजों का अत्याधुनिक डिवाइस क्लोजर तकनीक से सफल इलाज किया गया। इन सभी मरीजों के हृदय में मौजूद छेद बिना ओपन हार्ट सर्जरी के बंद किए गए। यह संपूर्ण उपचार मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना के तहत पूरी तरह निःशुल्क किया गया।
सामान्य परिस्थितियों में इस प्रक्रिया पर प्रति मरीज करीब डेढ़ से दो लाख रुपये का खर्च आता है, लेकिन इस शिविर के माध्यम से आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को बड़ी राहत मिली। मरीजों की उम्र 6 वर्ष से 40 वर्ष तक रही। प्रक्रिया इतनी सुरक्षित और आधुनिक रही कि अधिकतर मरीजों को मात्र एक दिन अस्पताल में रखकर अगले दिन छुट्टी दे दी गई।
जन्मजात हृदय छेद क्यों है खतरनाक
हृदय में छेद एक गंभीर जन्मजात बीमारी है, जिसमें हृदय के कक्षों के बीच छेद हो जाता है। समय रहते इलाज नहीं होने पर शुद्ध और अशुद्ध रक्त का आपस में मिलना शुरू हो जाता है, जिससे हार्ट फेलियर, शारीरिक-मानसिक विकास में बाधा और जीवन प्रत्याशा में कमी जैसी जटिलताएं हो सकती हैं।
पहले इसका इलाज ओपन हार्ट सर्जरी से किया जाता था, जिसमें लंबे समय तक अस्पताल में भर्ती रहना पड़ता था और रिकवरी में महीनों लग जाते थे। इसके अलावा बड़े चीरे के कारण कॉस्मेटिक समस्याएं भी होती थीं।
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बिना ऑपरेशन नई तकनीक से इलाज
इस शिविर में ट्रांसकैथेटर डिवाइस क्लोजर तकनीक का उपयोग किया गया। इस प्रक्रिया में छाती खोले बिना, जांघ में एक छोटे से छेद के जरिए अंब्रेला या डिस्क आकार की डिवाइस हृदय तक पहुंचाई जाती है, जो छेद को पूरी तरह बंद कर देती है। पूरी प्रक्रिया के दौरान ट्रांसएसोफेजियल इकोकार्डियोग्राफी और कलर डॉपलर से डिवाइस की स्थिति और रक्त प्रवाह की निगरानी की जाती है।
इलाज के बाद मरीजों को 24 घंटे आईसीयू में निगरानी में रखा गया और फिर आवश्यक दवाओं के साथ डिस्चार्ज किया गया। अधिकांश मरीज 48 घंटे के भीतर सामान्य दिनचर्या में लौट आए।
विशेषज्ञों की टीम का रहा अहम योगदान
इस शिविर में हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. पिंटू नाहटा के नेतृत्व में डॉ. दिनेश चौधरी, डॉ. सुनील बुडानिया, डॉ. रामगोपाल कुमावत और डॉ. राजवीर बेनीवाल की टीम ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। मुंबई से आए विशेषज्ञ डॉ. भूषण के मार्गदर्शन में सभी प्रक्रियाएं सफलतापूर्वक संपन्न हुईं। एनेस्थीसिया विभागाध्यक्ष डॉ. कांता भाटी और तकनीकी व नर्सिंग स्टाफ का भी विशेष सहयोग रहा।
डॉ. पिंटू नाहटा ने बताया कि अस्पताल में दो कैथ लैब पहले से कार्यरत हैं और तीसरी कैथ लैब शीघ्र स्थापित की जाएगी, जिससे बीकानेर संभाग और आसपास के क्षेत्रों के मरीजों को उन्नत हृदय चिकित्सा सुविधाएं बिना इंतजार के मिल सकेंगी।

