कानेर में फिर सजेगा ऊंट उत्सव का रंगारंग मंच
राजस्थान के बीकानेर शहर में 9 से 11 जनवरी तक आयोजित होने वाला अंतरराष्ट्रीय ऊंट उत्सव एक बार फिर देश-विदेश के सैलानियों को आकर्षित करने के लिए तैयार है। इस तीन दिवसीय आयोजन में इस बार परंपरा, प्रकृति और संस्कृति का अनूठा संगम देखने को मिलेगा। पर्यटन विभाग के अनुसार 2026 का ऊंट उत्सव पहले से ज्यादा विविध और खास आयोजनों के साथ मनाया जाएगा।
बर्ड फेस्टिवल बनेगा इस बार का नया आकर्षण
पर्यटन विभाग के संयुक्त निदेशक अनिल राठौड़ के अनुसार, इस बार ऊंट उत्सव के तहत 10 जनवरी को वन विभाग के सहयोग से बर्ड फेस्टिवल का आयोजन भी किया जाएगा। जुड़बीड़ क्षेत्र और लव-कुश वाटिका में बर्ड वॉचिंग और नेचर वॉक जैसे कार्यक्रम होंगे। इन गतिविधियों के दौरान गिद्ध, शिकारी पक्षियों और अन्य दुर्लभ प्रजातियों को करीब से देखने का अवसर मिलेगा।
सांस्कृतिक विरासत से होगी उत्सव की शुरुआत
9 जनवरी से शुरू होने वाला यह उत्सव बीकानेर की सांस्कृतिक पहचान को केंद्र में रखकर मनाया जाएगा। शहर में उत्सव के प्रचार के लिए परंपरागत रूप से पीले चावल बांटे जाएंगे। इसके साथ ही “हमारी विरासत” थीम के तहत हेरिटेज वॉक, कला प्रदर्शनी और बीकानेरी फूड फेस्टिवल का आयोजन होगा। मिस्टर बीकाणा और मिस मरवण जैसी प्रतियोगिताएं भी दर्शकों का ध्यान आकर्षित करेंगी।
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ऊंटों के करतब और फर्र कटिंग कला
ऊंट उत्सव का सबसे बड़ा आकर्षण ऊंटों की फर्र कटिंग कला और उनके अद्भुत करतब होते हैं। ऊंटों के शरीर पर बारीकी से की गई कटिंग के जरिए राजस्थानी मांडने और सांस्कृतिक प्रतीकों को उकेरा जाता है। इसके माध्यम से पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक संदेश भी दिए जाते हैं। हालांकि, समय के साथ इस परंपरागत कला से जुड़े कारीगरों की संख्या लगातार घटती जा रही है।
विदेशी पर्यटक भी लेते हैं भाग
ऊंट उत्सव की खासियत यह है कि इसमें विदेशी पर्यटक भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं। जानकारी के अनुसार जापान की एक महिला पर्यटक वर्षों तक केवल फर्र कटिंग प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए बीकानेर आती रही हैं। हालांकि इस वर्ष उनके आने की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन विदेशी सैलानियों की मौजूदगी उत्सव को अंतरराष्ट्रीय पहचान देती है।
ऊंट सज्जा पर खर्च होते हैं हजारों रुपये
ऊंट सज्जा प्रतियोगिता भी इस उत्सव का प्रमुख हिस्सा है। ऊंटों को सजाने में गोरबंद, चांदी का गिरबान, पीतल के पिलाण, घुंघरू और अन्य पारंपरिक आभूषणों का उपयोग किया जाता है। एक ऊंट को सजाने में कई बार 50 हजार रुपये से अधिक खर्च हो जाता है। ऊंट पालक इसके लिए कई दिन पहले से तैयारी शुरू कर देते हैं।
पहले की तुलना में घटे ऊंट पालक
अक्कासर गांव के ऊंट पालक रामलाल कूकणा बताते हैं कि पहले इस उत्सव में बड़ी संख्या में ऊंट पालक हिस्सा लेते थे, लेकिन अब यह संख्या काफी कम हो गई है। फर्र कटिंग जैसी जटिल कला में काफी मेहनत और अनुभव की जरूरत होती है, यही कारण है कि अब इसमें गिने-चुने लोग ही भाग ले रहे हैं।
पर्यटन को मिलेगा नया आयाम
पर्यटन विभाग का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय ऊंट उत्सव न केवल बीकानेर की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करता है, बल्कि स्थानीय कलाकारों और ऊंट पालकों को भी मंच देता है। 2026 का ऊंट उत्सव परंपरा और आधुनिकता के संतुलन के साथ बीकानेर को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर और मजबूत करेगा।

