पीबीएम अस्पताल पर फिर उठे सवाल, जनाना विंग की लापरवाही उजागर
बीकानेर के पीबीएम अस्पताल की अव्यवस्थाएं एक बार फिर चर्चा में हैं। जनाना विंग से जुड़ा एक मामला सामने आया है, जिसमें कथित चिकित्सकीय लापरवाही ने एक गर्भवती महिला की जान को संकट में डाल दिया। परिजनों का आरोप है कि डॉक्टर की गंभीर चूक के कारण महिला को अनावश्यक जोखिम झेलना पड़ा, जबकि समय रहते सही जांच होती तो स्थिति टाली जा सकती थी।
तबीयत बिगड़ने पर कराया गया था भर्ती
बीकानेर निवासी गर्भवती महिला की तबीयत बिगड़ने पर 19 दिसंबर को परिजन उसे पीबीएम अस्पताल लेकर पहुंचे। महिला का इलाज डॉ. संतोष खजोटिया की यूनिट में शुरू हुआ। डॉक्टर ने तत्काल सोनोग्राफी और रक्त जांच कराने के निर्देश दिए। रिपोर्ट देखने के बाद डॉक्टर ने महिला में गंभीर समस्या बताते हुए तत्काल सर्जरी की सलाह दी।
25 टांकों की सर्जरी, फिर अस्पताल से छुट्टी
परिजनों ने महिला की स्थिति को देखते हुए डॉक्टर की सलाह पर भरोसा किया और सर्जरी के लिए सहमति दी। डॉ. खजोटिया द्वारा महिला की सर्जरी की गई, जिसमें करीब 25 टांके लगाए गए। कुछ दिन अस्पताल में रखने के बाद महिला को छुट्टी दे दी गई।
15 दिन बाद फिर बिगड़ी हालत, चौंकाने वाली रिपोर्ट
4 जनवरी को महिला की तबीयत दोबारा बिगड़ गई। परिजन उसे फिर पीबीएम अस्पताल लेकर पहुंचे। इस बार दोबारा सोनोग्राफी कराई गई, जिसमें डॉक्टर ने बताया कि महिला के पेट में एक और भ्रूण मौजूद है। यह जानकारी सामने आने के बाद परिजन सकते में आ गए और डॉक्टर पर लापरवाही का आरोप लगाया।
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परिजनों का कहना है कि जब 19 दिसंबर को सोनोग्राफी हुई थी, तब जुड़वां भ्रूण की जानकारी क्यों नहीं दी गई। उनका सवाल है कि यदि इतने दिनों तक दूसरा भ्रूण पेट में रहने से महिला की जान को कोई नुकसान होता, तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेता।
भर्ती होने के बावजूद इलाज नहीं होने का आरोप
परिजनों का यह भी आरोप है कि महिला फिलहाल अस्पताल में भर्ती है, लेकिन उसे कोई ठोस इलाज नहीं दिया जा रहा। स्थिति को लेकर परिवार में गहरा आक्रोश और भय का माहौल है।
भाजपा नेताओं ने उठाया मामला
घटना की जानकारी मिलते ही भाजपा के पूर्व जिला उपाध्यक्ष डॉ. भगवान सिंह मेड़तिया, युवा मोर्चा जिलाध्यक्ष वेद व्यास सहित अन्य पदाधिकारी सक्रिय हुए। वेद व्यास ने डॉक्टर संतोष खजोटिया से फोन पर बात करने की कोशिश की, लेकिन आरोप है कि डॉक्टर ने संतोषजनक जवाब नहीं दिया और कॉल काट दी।
इसके बाद डॉ. भगवान सिंह मेड़तिया ने पीबीएम प्रिंसिपल डॉ. सुरेन्द्र वर्मा से बात कर मामले को गंभीर बताया। उन्होंने 15 दिन के भीतर दो बार सर्जरी की सलाह को संदिग्ध बताते हुए लापरवाही करने वाले डॉक्टर पर अनुशासनात्मक कार्रवाई और महिला को समुचित इलाज उपलब्ध कराने की मांग की।

