बीकानेर। जिले में एक ओर सोलर प्लांट के नाम पर खेजड़ी जैसे संरक्षित वृक्षों को रेगिस्तानी इलाकों से हटाया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर वन संपदा को नुकसान पहुंचाने के गंभीर मामले भी सामने आ रहे हैं। ताजा मामला छतरगढ़ क्षेत्र से जुड़ा है, जहां मानव सेवा आश्रम के पीछे स्थित वन भूमि में बड़े पैमाने पर हरे-भरे पेड़ों की अवैध कटाई की जा रही है।
स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, वन क्षेत्र में सैकड़ों पेड़ों को काटा जा चुका है और यह सिलसिला लगातार जारी है। हैरानी की बात यह है कि दिनदहाड़े ट्रैक्टरों में लकड़ी भरकर ले जाई जा रही है, लेकिन वन विभाग की ओर से न तो कोई निगरानी नजर आ रही है और न ही अब तक किसी प्रकार की ठोस कार्रवाई की गई है। ग्रामीणों का आरोप है कि जिम्मेदार अधिकारी आंखें मूंदे बैठे हैं, जिससे असामाजिक तत्वों के हौसले बुलंद हो गए हैं।
इस पूरे मामले को लेकर पर्यावरण प्रेमियों और सामाजिक संगठनों ने गहरी चिंता जताई है। उनका कहना है कि यदि समय रहते अवैध कटाई पर रोक नहीं लगाई गई, तो इसका सीधा असर पर्यावरण संतुलन पर पड़ेगा और आने वाली पीढ़ियों को इसके गंभीर दुष्परिणाम भुगतने होंगे। वन क्षेत्र का लगातार सिमटना न केवल जैव विविधता के लिए खतरा है, बल्कि स्थानीय जलवायु पर भी इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

