बीकानेर। राजकीय विद्यालयों के भवनों की बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए आवंटित मरम्मत बजट का समय पर उपयोग अनिवार्य कर दिया गया है। माध्यमिक शिक्षा निदेशालय ने सभी विद्यालयों के प्रधानाचार्यों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में स्वीकृत राशि का उपयोग न करने पर नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।
माध्यमिक शिक्षा निदेशालय के वित्तीय सलाहकार द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि सामान्य मरम्मत, शौचालय निर्माण या सुधार, क्षतिग्रस्त चारदीवारी की मरम्मत और रंग-रोगन जैसी गतिविधियों के लिए आवंटित राशि का समयबद्ध उपयोग अनिवार्य है।
निर्देशालय के अनुसार, 14 जुलाई और 22 जुलाई 2025 को जारी आदेशों के तहत कुल 126 स्कूलों के लिए राज्य निधि से 258.55 लाख रुपए स्वीकृत किए गए थे। इसमें 29 विद्यालयों के लिए 57.93 लाख, 80 विद्यालयों के लिए 118.10 लाख और 19 विद्यालयों के लिए 82.52 लाख रुपए शामिल हैं।
आईएफएमएस रिपोर्ट की समीक्षा में यह पाया गया कि कई विद्यालय अब तक निर्धारित कार्यों में बजट का उपयोग नहीं कर पाए हैं। शिक्षा विभाग ने इसे आदेशों की अवहेलना माना है। विभाग ने कहा है कि बजट केवल उन स्कूलों को उनकी वास्तविक मरम्मत आवश्यकताओं के अनुसार आवंटित किया गया है। यदि राशि का समय पर उपयोग नहीं किया गया, तो यह माना जाएगा कि विद्यालय को मरम्मत की आवश्यकता नहीं थी।
साथ ही निदेशालय ने चेतावनी दी है कि यदि कोई स्कूल गलत या अतिरंजित मांग प्रस्तुत करता है, तो संबंधित प्रधानाचार्य के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। सभी प्रधानाचार्यों को निर्देशित किया गया है कि आवंटित बजट का उपयोग नियत समय में सुनिश्चित करें, अन्यथा विभाग कड़ी कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगा।
शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि बजट का समय पर और सही तरीके से उपयोग विद्यालयों में सुविधाओं को बेहतर बनाने के साथ-साथ छात्रों की शिक्षा और स्वास्थ्य पर भी सकारात्मक असर डालेगा।