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Khabar21 > Blog > देश-दुनिया > बालू रंग के अपाचे क्यों बन रहे पाक बॉर्डर पर दुश्मन का काल
देश-दुनिया

बालू रंग के अपाचे क्यों बन रहे पाक बॉर्डर पर दुश्मन का काल

editor
editor Published December 18, 2025
Last updated: 2025/12/18 at 7:25 PM
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नई दिल्ली/जोधपुर। भारतीय सेना की पश्चिमी सीमा पर ताकत अब और बढ़ने जा रही है। अमेरिका से भेजे गए अंतिम तीन AH-64E अपाचे अटैक हेलिकॉप्टर भारत पहुंच चुके हैं। इसके साथ ही राजस्थान के जोधपुर स्थित 451 आर्मी एविएशन स्क्वाड्रन का अपाचे बेड़ा पूरी तरह तैयार हो गया है। सेना इन्हें पाकिस्तान सीमा से सटे रेगिस्तानी इलाकों में अपनी अटैक एविएशन रणनीति का अहम हथियार बना रही है।

Contents
जोधपुर स्क्वाड्रन हुआ पूराहिंडन एयरबेस पर असेंबलिंग, फिर जोधपुर तैनातीरेगिस्तान के लिए खास क्यों है अपाचे का बालू रंगदेरी से आई डिलीवरी, अब पूरी हुईक्यों कहलाता है अपाचे ‘फ्लाइंग टैंक’ड्रोन कंट्रोल से लेकर हाई स्पीड तकदो पायलट, एक घातक मशीनदुनिया भर में अपाचे की धाकपश्चिमी सीमा पर बदलेगा समीकरण

जोधपुर स्क्वाड्रन हुआ पूरा

अमेरिकी दूतावास ने सोशल मीडिया के माध्यम से शेष तीन अपाचे हेलिकॉप्टरों के भारत पहुंचने की पुष्टि की। इससे पहले 22 जुलाई को तीन अपाचे का पहला बैच आया था। अब सभी छह हेलिकॉप्टर मिलने के बाद जोधपुर स्थित स्क्वाड्रन पूरी तरह ऑपरेशनल होने की दिशा में बढ़ चुका है।

हिंडन एयरबेस पर असेंबलिंग, फिर जोधपुर तैनाती

हिंडन एयरबेस पर इन हेलिकॉप्टरों की असेंबलिंग प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। तकनीकी जांच, ग्राउंड ट्रायल और औपचारिकताओं के बाद इन्हें उड़ान के लिए तैयार किया जाएगा। पूरी प्रक्रिया में करीब एक सप्ताह का समय लगने का अनुमान है। इसके बाद अपाचे हेलिकॉप्टरों को जोधपुर लाकर स्क्वाड्रन में शामिल किया जाएगा।

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रेगिस्तान के लिए खास क्यों है अपाचे का बालू रंग

AH-64E अपाचे का बालू रंग केवल डिजाइन नहीं, बल्कि एक रणनीतिक जरूरत है। बोइंग कंपनी ने भारत के लिए इन हेलिकॉप्टरों को खास तौर पर रेगिस्तानी रंग में तैयार किया है, ताकि वे थार जैसे इलाकों में दुश्मन की नजर से आसानी से बच सकें। यह रंग रडार और विजुअल डिटेक्शन दोनों को कठिन बनाता है, जिससे अपाचे को युद्ध के दौरान बढ़त मिलती है।

देरी से आई डिलीवरी, अब पूरी हुई

भारतीय सेना ने वर्ष 2020 में अमेरिका के साथ लगभग 600 मिलियन डॉलर का समझौता कर छह अपाचे हेलिकॉप्टरों का ऑर्डर दिया था। वैश्विक सप्लाई चेन में आई बाधाओं और तकनीकी कारणों से डिलीवरी करीब 15 महीने देरी से पूरी हो पाई। इससे पहले भारतीय वायुसेना अपने बेड़े में 22 अपाचे हेलिकॉप्टर शामिल कर चुकी है।

क्यों कहलाता है अपाचे ‘फ्लाइंग टैंक’

अपाचे AH-64E को उसकी घातक मारक क्षमता के कारण ‘फ्लाइंग टैंक’ कहा जाता है। यह हेलिकॉप्टर हेलफायर मिसाइल, 70 मिमी रॉकेट और 30 मिमी चेन गन से लैस होता है। यह टैंक, बंकर और एयर डिफेंस सिस्टम को सटीकता से तबाह करने में सक्षम है। अत्याधुनिक सेंसर, नाइट फाइटिंग क्षमता और नेटवर्क आधारित युद्ध प्रणाली इसे बेहद खतरनाक बनाती है।

ड्रोन कंट्रोल से लेकर हाई स्पीड तक

AH-64E संस्करण में डिजिटल कनेक्टिविटी, शक्तिशाली इंजन और ड्रोन को रियल टाइम में नियंत्रित करने जैसी आधुनिक क्षमताएं शामिल हैं। इसकी अधिकतम गति लगभग 280 किलोमीटर प्रति घंटा है और यह एक बार में करीब 550 किलोमीटर तक उड़ान भर सकता है। हवा में लगभग तीन घंटे तक लगातार रहने की क्षमता इसे लंबी सैन्य कार्रवाई के लिए उपयुक्त बनाती है।

दो पायलट, एक घातक मशीन

अपाचे को उड़ाना आसान नहीं होता। इसके लिए लंबी और कठोर ट्रेनिंग जरूरी होती है। इसे दो पायलट मिलकर संचालित करते हैं। पीछे बैठा पायलट उड़ान और नियंत्रण संभालता है, जबकि आगे बैठा पायलट हथियार प्रणाली और लक्ष्य साधने की जिम्मेदारी निभाता है। इसकी सबसे बड़ी ताकत इसकी असाधारण सटीकता मानी जाती है।

दुनिया भर में अपाचे की धाक

दुनिया में 400 से अधिक अपाचे हेलिकॉप्टर सेवा में हैं और अमेरिकी सेना का अपाचे बेड़ा 45 लाख से ज्यादा उड़ान घंटे पूरे कर चुका है। भारत से पहले बोइंग कंपनी ने इसे अमेरिका, इजराइल, मिस्र, जापान, सऊदी अरब, कतर और सिंगापुर सहित कई देशों को सप्लाई किया है।

पश्चिमी सीमा पर बदलेगा समीकरण

डिफेंस सिक्योरिटी कोऑपरेशन एजेंसी के अनुसार, अपाचे AH-64E के शामिल होने से भारतीय सेना की युद्धक क्षमता में बड़ा इजाफा होगा। खासतौर पर राजस्थान और पश्चिमी सीमा के रेगिस्तानी इलाकों में यह हेलिकॉप्टर दुश्मन के लिए सबसे बड़ा खतरा साबित हो सकता है। इसे भारतीय सेना के आधुनिकीकरण की दिशा में एक निर्णायक कदम माना जा रहा है।


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editor December 18, 2025
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