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देश-दुनिया

सुप्रीम कोर्ट की जज बोलीं: जज बदलने पर फैसले नहीं बदलने चाहिए

editor
editor Published November 30, 2025
Last updated: 2025/11/30 at 3:45 PM
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सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस बीवी नागरत्ना ने हाल ही में न्यायपालिका में बढ़ती प्रवृत्ति पर गंभीर चिंता जताई है, जिसमें विशेष बेंचें पहले दिए गए फैसलों को बदल देती हैं। उनका कहना है कि अदालत के फैसलों को केवल इसलिए दोबारा नहीं खोला जाना चाहिए कि उन्हें लिखने वाला जज अब बदल गया है या सेवानिवृत्त हो चुका है। उन्होंने जोर देकर कहा कि न्यायिक फैसलों की स्थिरता ही अदालत की विश्वसनीयता का आधार होती है।

Contents
फैसले समय की कसौटी पर टिकने चाहिएहाल के फैसलों पर उठे सवालन्यायिक स्वतंत्रता जजों के व्यवहार से भी सुरक्षितफैसले पलटने के ट्रेंड पर पहले भी जताई जा चुकी है चिंतासंवैधानिक व्यवस्था जनता के विश्वास पर आधारित

फैसले समय की कसौटी पर टिकने चाहिए

ओपी जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी, सोनीपत में आयोजित न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि लोकतंत्र में शासन व्यवस्था जनता के अदालतों और संविधान पर भरोसे पर टिकी होती है। उनका कहना था कि न्यायिक निर्णय रेत पर नहीं, बल्कि स्थायी आधार पर लिखे जाने चाहिए। उन्होंने स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि “सिर्फ चेहरों के बदल जाने से फैसलों को फिर से देखने की जरूरत नहीं पड़नी चाहिए।”

हाल के फैसलों पर उठे सवाल

जस्टिस नागरत्ना का यह बयान तब आया है जब सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में कई अहम फैसलों—जैसे वनशक्ति, दिल्ली पटाखा बैन, टीएन राज्यपाल से जुड़े आदेश और भूषण स्टील इन्सॉल्वेंसी मामले—की पुनर्विचार सुनवाई में उन्हें उलट दिया। इन घटनाओं ने न्यायिक स्थिरता पर व्यापक बहस छेड़ दी है।

न्यायिक स्वतंत्रता जजों के व्यवहार से भी सुरक्षित

जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि न्यायपालिका की आजादी केवल फैसलों में नहीं, बल्कि जजों के व्यक्तिगत आचरण में भी दिखनी चाहिए। उन्होंने राजनीतिक दूरी को आवश्यक बताया, ताकि जनता को न्यायिक निष्पक्षता पर कभी संदेह न हो। उनके अनुसार, कानून का राज तभी मजबूत रहता है जब जनता संविधान और न्यायपालिका—दोनों पर भरोसा बनाए रखे।

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फैसले पलटने के ट्रेंड पर पहले भी जताई जा चुकी है चिंता

कुछ दिन पहले जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की बेंच ने भी टिप्पणी की थी कि हाल के दिनों में ऐसी प्रवृत्ति बढ़ रही है, जिसमें कुछ पक्षों की नाराजगी के चलते फैसलों को अगली बेंच बदल देती है, चाहे वह फैसला देने वाला जज पद पर हो या सेवानिवृत्त।

संवैधानिक व्यवस्था जनता के विश्वास पर आधारित

जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि लोकतांत्रिक ढांचे को चलाने के लिए दो स्तंभ जरूरी हैं—संविधान में जनता का विश्वास और न्यायपालिका पर भरोसा। उन्होंने कहा कि यह दोहरा विश्वास ही किसी भी संवैधानिक शासन का आधार बनता है।


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editor November 30, 2025
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