कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद शशि थरूर ने एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक कार्यक्रम में शामिल होने के बाद उनकी सार्वजनिक रूप से सराहना की है। यह प्रशंसा ऐसे समय में आई है जब बिहार विधानसभा चुनावों में कांग्रेस को करारी हार का सामना करना पड़ा है।
प्रधानमंत्री मोदी के बयान पर थरूर का समर्थन
मंगलवार को एक कार्यक्रम में प्रधानमंत्री मोदी के भाषण के बाद, थरूर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अपनी उपस्थिति और प्रधानमंत्री के संबोधन के मुख्य बिंदुओं का उल्लेख किया। थरूर ने कहा कि उन्हें बुरी खांसी और सर्दी के बावजूद दर्शकों के बीच उपस्थित होकर खुशी हुई।
थरूर के अनुसार, पीएम मोदी के भाषण का एक महत्वपूर्ण हिस्सा थॉमस मैकाले द्वारा स्थापित 200 साल पुरानी ‘गुलामी मानसिकता’ की विरासत को पलटने पर केंद्रित था। प्रधानमंत्री ने भारत की गौरवशाली विरासत, भाषाओं और ज्ञान प्रणालियों में गर्व को बहाल करने के लिए एक दशक लंबे राष्ट्रीय मिशन का आह्वान किया।
प्रधानमंत्री मोदी ने भारतीयों से यह आह्वान किया: “मैं पूरे देश से अपील करना चाहता हूँ: अगले दशक में हमें मैकाले द्वारा भारत पर थोपी गई गुलामी की मानसिकता से खुद को मुक्त करने का संकल्प लेना चाहिए। आने वाले 10 साल बेहद महत्वपूर्ण हैं।”
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चुनावी मूड बनाम भावनात्मक मूड
शशि थरूर ने अपने पोस्ट में इस बात पर भी प्रकाश डाला कि प्रधानमंत्री मोदी ने देश की आर्थिक मजबूती पर ज़ोर दिया और भारत को दुनिया के लिए एक उभरते हुए मॉडल के रूप में प्रस्तुत किया।
प्रधानमंत्री पर अक्सर “चुनावी मूड” में रहने के आरोप लगते रहे हैं, जिसका ज़िक्र करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि वह वास्तव में लोगों की समस्याओं के समाधान के लिए ‘भावनात्मक मूड’ में थे। थरूर ने इस स्पष्टीकरण की भी प्रशंसा की।
आंतरिक कलह और पार्टी की प्रतिक्रिया
यह सराहना बिहार चुनावों में एनडीए को मिली प्रचंड बहुमत (202 सीटें) और कांग्रेस की निराशाजनक हार (61 में से केवल 6 सीटें) के कुछ ही दिनों बाद आई है।
प्रधानमंत्री या सरकार के किसी कदम की प्रशंसा करने पर कांग्रेस सांसद शशि थरूर अक्सर अपनी ही पार्टी के भीतर आलोचना का शिकार बन जाते हैं। कुछ महीने पहले, जब सरकार ने विदेश में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करने के लिए थरूर को नामित किया था, तब भी पार्टी में आंतरिक कलह खुलकर सामने आई थी, क्योंकि कांग्रेस ने औपचारिक रूप से उनके नाम की सिफारिश नहीं की थी। थरूर की लगातार प्रधानमंत्री की तारीफों ने उन्हें पार्टी के कुछ वर्गों के निशाने पर ला दिया है।

