जयपुर में साइबर ठगों का बड़ा खुलासा: किराए के बैंक खातों से 10 करोड़ की ठगी, 7 गिरफ्तार
जयपुर: राजस्थान पुलिस की साइबर सेल ने मानसरोवर और शिप्रापथ थाना पुलिस के साथ संयुक्त कार्रवाई कर एक ऐसे संगठित साइबर गिरोह का पर्दाफाश किया है, जिसने पांच राज्यों में करीब 10 करोड़ रुपए की ठगी को अंजाम दिया। गिरोह किराए पर बैंक खाते लेकर उनका इस्तेमाल धोखाधड़ी के लिए करता था।
गिरफ्तारी के दौरान आरोपियों के कब्जे से भारी मात्रा में डिजिटल उपकरण और फर्जी दस्तावेज बरामद किए गए हैं। इन पर राजस्थान, झारखंड, उत्तरप्रदेश, महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश में 25 से अधिक शिकायतें दर्ज हैं।
झूठे अपहरण की सूचना से खुला मामला
DCP (साउथ) राजर्षि राज ने बताया कि 24 अगस्त को पुलिस कंट्रोल रूम में मानसरोवर क्षेत्र से एक युवक अनुज कुमार द्वारा अपहरण की सूचना दी गई। पुलिस टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए अनुज को पकड़ा, लेकिन पूछताछ में सामने आया कि उसने खुद के अपहरण की झूठी सूचना दी थी।
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जांच के दौरान पुलिस को अनुज के साथ झुंझुनूं थाने का हिस्ट्रीशीटर राकेश उर्फ हनी और उसका साथी मुकेश सिंह मिला। तलाशी में इनके पास से 8 मोबाइल, 2 एटीएम कार्ड और 2 सिम कार्ड बरामद हुए, जिससे साइबर ठगी के इस नेटवर्क की परतें खुलती गईं।
गिरोह ऐसे करता था ठगी
पुलिस जांच में सामने आया कि गिरोह लोगों से मोटी रकम देकर उनके बैंक खाते किराए पर लेता था। इसके बाद इन खातों का इस्तेमाल फर्जी कॉल्स, ऑनलाइन स्कैम और KYC के नाम पर लोगों को फंसाकर पैसे हड़पने में किया जाता था।
ठगी के जरिए प्राप्त राशि को कई खातों में ट्रांसफर कर ट्रैकिंग से बचा जाता था। कुछ आरोपी फर्जी सिम और एटीएम कार्ड से पैसे निकालते थे, जबकि कुछ खातों को ऑपरेट करते थे।
ये आरोपी हुए गिरफ्तार
एडिशनल डीसीपी (साउथ) ललित किशोर शर्मा ने बताया कि गिरफ्तार किए गए आरोपियों में—
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राकेश कुमार उर्फ हनी (26) – सिंघाना, झुंझुनूं – गिरोह का सरगना
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मुकेश सिंह (30) – गिरोह का सहयोगी
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अनुज कुमार (21) – बैंक खाता उपलब्ध करवाने वाला
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अजरूद्दीन अहमद उर्फ अजर (26) – शास्त्री नगर
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आरिश खान (20) – भट्टा बस्ती
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कन्हैयालाल (24) – खातों की सप्लाई
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चन्द्रप्रकाश पूर्बिया (27) – खातों का संचालन करता था
इन सभी पर साइबर पोर्टल पर धोखाधड़ी, फर्जीवाड़ा, डिजिटल अपराध और डेटा मैनिपुलेशन के मामले दर्ज हैं।
पुलिस को मिले अहम सबूत
गिरोह के ठिकानों पर छापेमारी के दौरान पुलिस ने—
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17 कंप्यूटर
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32 मोबाइल फोन
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16 अतिरिक्त सिम कार्ड
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30 एटीएम कार्ड
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₹2.35 लाख नकद
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महत्वपूर्ण दस्तावेज
जब्त किए हैं, जिनकी मदद से और भी मामलों का पता चलने की संभावना है।
साइबर अपराध से सतर्क रहने की जरूरत
यह मामला एक बार फिर साबित करता है कि साइबर अपराधी लगातार नई तरकीबें अपनाकर आम जनता को ठगने की कोशिश करते हैं। ऐसे में किसी भी अज्ञात कॉल, फर्जी KYC अनुरोध, या ओटीपी साझा करने से पहले सतर्क रहना बेहद जरूरी है।
निष्कर्ष: टेक्नोलॉजी का दुरुपयोग बन रहा है चुनौती
राजस्थान में पकड़े गए इस गिरोह ने दिखा दिया कि साइबर क्राइम अब सीमाओं तक सीमित नहीं रहा। पुलिस और साइबर सेल की सजगता से भले ही यह गिरोह पकड़ा गया हो, लेकिन आमजन की जागरूकता और सतर्कता ही ऐसे अपराधों से वास्तविक सुरक्षा दे सकती है।