अमेरिकी कोर्ट के टैरिफ़ को ग़ैरक़ानूनी बताने पर ट्रंप ने कहा: देश को बर्बाद कर देगा यह फ़ैसला
अमेरिका की एक अपीलीय अदालत ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए अधिकांश टैरिफ़ को अवैध ठहराने का ऐतिहासिक फ़ैसला सुनाया है। यह फ़ैसला अमेरिका की विदेशी व्यापार नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है। ट्रंप ने इस निर्णय को देश के लिए ख़तरे की घंटी करार दिया है, और इसे अर्थव्यवस्था के लिए विनाशकारी बताया है।
कोर्ट का फैसला: टैरिफ़ अवैध और अमान्य
अमेरिकी फेडरल सर्किट अपीलीय कोर्ट ने 7-4 के बहुमत से फैसला सुनाया कि ट्रंप द्वारा लगाए गए टैरिफ़, जो आपातकालीन आर्थिक शक्तियों के तहत लगाए गए थे, वे कानून के ख़िलाफ़ हैं। कोर्ट ने यह भी कहा कि टैरिफ़ लगाना राष्ट्रपति के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता, और यह कार्य कांग्रेस की शक्ति के दायरे में आता है। फैसले में यह भी कहा गया कि इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) के तहत टैरिफ़ लगाना कानूनी रूप से मंजूरी प्राप्त नहीं कर सकता।
अदालत ने कहा कि जब भी कांग्रेस ने राष्ट्रपति को टैरिफ़ लगाने का अधिकार देना चाहा है, तो वह इसे स्पष्ट शब्दों में किया है, और ऐसा कभी नहीं किया गया कि टैरिफ़ को राष्ट्रपति की शक्तियों के तहत निर्धारित किया जाए।
ट्रंप का बयान: “अगर यह फ़ैसला बरकरार रहा तो यह देश को बर्बाद कर देगा”
ट्रंप ने कोर्ट के फ़ैसले की आलोचना करते हुए “ट्रुथ सोशल” पर कहा, “अगर यह फ़ैसला बरकरार रहा, तो यह अमेरिका को सचमुच तबाह कर देगा।” उन्होंने इस फैसले को गलत ठहराते हुए कहा कि अगर यह टैरिफ़ हटाए गए, तो अमेरिका को बहुत बड़ा आर्थिक नुकसान होगा, और राष्ट्रीय सुरक्षा को भी खतरा हो सकता है।
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ट्रंप ने इन टैरिफ़ को अंतरराष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्तियाँ अधिनियम (IEEPA) के तहत उचित ठहराया था, जिसे वह असामान्य और असाधारण खतरों के खिलाफ देश की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए लागू कर रहे थे। हालांकि, अदालत ने इसे अवैध ठहराया।
क्या थे ट्रंप के टैरिफ़?
ट्रंप के द्वारा लगाए गए इन “रेसिप्रोकल टैरिफ़” का उद्देश्य था कि दूसरे देशों से आयातित सामान पर शुल्क लगाकर अमेरिका की व्यापार असंतुलन को सही किया जाए और राष्ट्रीय सुरक्षा को सुरक्षित किया जाए। यह टैरिफ़ मुख्य रूप से चीन, मेक्सिको, और कनाडा पर लगाए गए थे, और ट्रंप ने इन्हें आर्थिक आपातकाल के रूप में प्रस्तुत किया था।
व्हाइट हाउस की चिंता
व्हाइट हाउस के वकीलों ने चेतावनी दी थी कि अगर इन टैरिफ़ को अवैध करार दिया गया, तो यह अमेरिका को महामंदी जैसे हालात में डाल सकता है, जैसा कि 1929 में हुआ था। उन्होंने कहा था, “यदि राष्ट्रपति के टैरिफ़ अधिकारों को अचानक रद्द कर दिया गया, तो यह हमारे राष्ट्रीय सुरक्षा और अर्थव्यवस्था के लिए विनाशकारी होगा।”
मामला सुप्रीम कोर्ट तक जाएगा
इस फैसले के बाद अब यह लगभग तय है कि मामला अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचेगा। सुप्रीम कोर्ट को यह तय करना होगा कि क्या ट्रंप का यह टैरिफ़ कार्यक्रम संविधान के तहत वैध था या नहीं। सुप्रीम कोर्ट में अब तक के अधिकांश फैसले राष्ट्रपति के विशाल अधिकारों के खिलाफ रहे हैं, जो वे बिना कांग्रेस की मंजूरी के लागू करने का प्रयास करते हैं।
टैरिफ़ के प्रभाव
इस फैसले से ट्रंप द्वारा लगाए गए कई टैरिफ़, जिनमें चीन, मेक्सिको, और कनाडा पर लगाए गए शुल्क शामिल थे, अब रद्द हो सकते हैं। हालांकि, यह निर्णय स्टील और एल्युमिनियम पर लगाए गए टैरिफ़ पर लागू नहीं होता, क्योंकि वे राष्ट्रपति को प्राप्त अन्य अधिकारों के तहत लगाए गए थे।
यह सुप्रीम कोर्ट का फैसला अब ट्रंप प्रशासन और भविष्य की अमेरिकी व्यापार नीति पर प्रभाव डाल सकता है। यदि सुप्रीम कोर्ट इस फैसले को पलटता है, तो अमेरिका को अंतर्राष्ट्रीय व्यापार समझौतों में गंभीर असर का सामना करना पड़ सकता है।