भारत में बढ़ रहे eSIM फ्रॉड: सरकार ने दी चेतावनी, अपनाएं ये 3 उपाय
भारत में साइबर ठगों द्वारा eSIM का दुरुपयोग बढ़ने के कारण सरकार ने चेतावनी जारी की है। खासकर मोबाइल नंबर हाइजैकिंग और बैंक खातों से अवैध पैसे निकाले जाने के मामलों में तेजी आई है। भारतीय साइबर क्राइम समन्वय केंद्र (I4C) ने इसे लेकर हाल ही में एक आधिकारिक बयान जारी किया है। चलिए जानते हैं कि eSIM फ्रॉड क्या है, इससे कैसे बचें, और इससे जुड़ी प्रमुख घटनाएँ क्या रही हैं।
I4C की चेतावनी और बढ़ते साइबर फ्रॉड
I4C, जो भारत सरकार के गृह मंत्रालय के तहत काम करता है, ने नागरिकों को eSIM धोखाधड़ी के बारे में जागरूक किया है। केंद्र का उद्देश्य साइबर अपराधों पर नियंत्रण और एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना है। I4C के मुताबिक, ठग अब eSIM का इस्तेमाल करके लोगों के मोबाइल नंबर को हथियाने लगे हैं, और फिर बैंक अकाउंट से पैसे निकालने का काम कर रहे हैं।
eSIM फ्रॉड कैसे होता है?
eSIM फ्रॉड में ठग सबसे पहले पीड़ित को कॉल करके एक एक्टिवेशन लिंक भेजते हैं। जब पीड़ित इस लिंक पर क्लिक करता है, तो उनका फिजिकल सिम बदलकर eSIM में बदल जाता है। इसके बाद मोबाइल नेटवर्क सिग्नल बंद हो जाता है और सभी कॉल और OTP अब ठग के पास पहुंचने लगते हैं। इस दौरान ठग को प्राप्त OTP का इस्तेमाल करके वह बैंक ट्रांजैक्शन कर सकते हैं।
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साइबर ठग कैसे निकालते हैं पैसे?
eSIM फ्रॉड के मामलों में, भले ही व्यक्ति ने अपने ATM या UPI को बंद कर रखा हो, फिर भी ठग आसानी से बैंक खाते से पैसे निकाल लेते हैं। I4C ने उदाहरण दिया कि एक मामले में एक व्यक्ति ने ATM और UPI सुविधा बंद कर रखी थी, फिर भी ठगों ने उसके बैंक खाते से 4 लाख रुपये निकाल लिए।
eSIM फ्रॉड से बचने के लिए I4C की सलाह
I4C ने नागरिकों को तीन प्रमुख उपायों के बारे में बताया है, जिनसे लोग इस धोखाधड़ी से बच सकते हैं:
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अनजान कॉल और लिंक से सावधान रहें:
किसी भी अजनबी से आए कॉल या लिंक पर क्लिक करने से बचें। विशेष रूप से eSIM एक्टिवेशन के लिए भेजे गए लिंक से बचें। -
eSIM के लिए खुद अनुरोध करें:
अगर आपको अपना सिम eSIM में बदलवाना हो, तो इसे खुद से टेलीकॉम सर्विस प्रोवाइडर से कराएं। किसी अजनबी पर भरोसा न करें। -
नेटवर्क सिग्नल खोने पर तुरंत कार्रवाई करें:
अगर आपके फोन का नेटवर्क अचानक बंद हो जाए तो तुरंत अपने बैंक और टेलीकॉम सर्विस प्रोवाइडर को सूचित करें।
सरकार की नई पहल और ब्लैकलिस्टिंग
कुछ हफ्ते पहले, भारत सरकार ने दूरसंचार विभाग (DoT) के जरिए यह घोषणा की थी कि 3 से 4 लाख SIM कार्ड्स को ब्लैकलिस्ट कर दिया गया है। ये SIM कार्ड्स ज्यादातर वित्तीय धोखाधड़ी में इस्तेमाल हो रहे थे। AI टूल्स की मदद से रोजाना लगभग 2000 जोखिमपूर्ण नंबर पहचाने जा रहे हैं, जो धोखाधड़ी में इस्तेमाल हो रहे थे।
हालिया घटनाएँ
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मुंबई में 4 लाख की धोखाधड़ी: मुंबई में एक व्यक्ति ने हाल ही में धोखाधड़ी का शिकार होकर 4 लाख रुपये गंवाए। साइबर अपराधियों ने उसे एक फर्जी eSIM एक्टिवेशन लिंक भेजा था। लिंक पर क्लिक करने के बाद उसका फिजिकल सिम eSIM में बदल गया और उसके बैंक से 4 लाख रुपये निकाल लिए गए।
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नोएडा में 15.5 लाख की ठगी: नोएडा के एक 50 वर्षीय सॉफ्टवेयर डेवलपर को जुलाई में एक अन्य ठगी का शिकार होना पड़ा। ठगों ने उन्हें एक 16 अंकों का EID कोड दिया, जिसे दर्ज करने के बाद उनका सिम ठगों के पास चला गया। फिर उन्होंने बैंक ट्रांजैक्शन कर 15.5 लाख रुपये निकाल लिए।
eSIM फ्रॉड के बढ़ते मामले: क्या करें?
eSIM फ्रॉड के मामलों में बढ़ोतरी को देखते हुए नागरिकों को सतर्क रहने की आवश्यकता है। साइबर ठग अपनी योजनाओं को और अधिक sophisticated बना रहे हैं, जिससे नुकसान का खतरा बढ़ रहा है। I4C द्वारा दिए गए उपायों का पालन करके इस धोखाधड़ी से बचा जा सकता है।