

कांजी हाउस बना मौत का घर, तड़पते गोवंश और लाशों पर मंडराते कुत्ते
बीकानेर। गोवंश संरक्षण को लेकर सरकारी दावों की सच्चाई बीकानेर के कांजी हाउस में खुलकर सामने आ रही है। यह स्थान अब बेसहारा पशुओं के लिए शरणस्थली नहीं, बल्कि कब्रगाह बनता जा रहा है। यहां चारा-पानी की भारी कमी, देखरेख की लापरवाही और प्रशासनिक उदासीनता के कारण हालात बेहद चिंताजनक हो गए हैं।
हाल ही में जांच के दौरान कांजी हाउस में 15 गायें मृत पाई गईं, जबकि कई मरणासन्न अवस्था में थीं। मृत गायों की लाशों पर कुत्तों के काटने के निशान साफ देखे गए। कुछ हिस्सों में तो बाहर से ताले लगे थे, जिनके अंदर पशु दम तोड़ रहे थे।
बता दें कि कांजी हाउस की क्षमता करीब 2300 पशुओं की है, लेकिन व्यवस्थाएं बेहद बदहाल हैं। चारा-पानी की अनुपलब्धता और समय पर देखरेख नहीं होने से प्रतिदिन कई गोवंश दम तोड़ रहे हैं।
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सूचना मिलने पर बीकानेर पश्चिम विधायक जेठानंद व्यास स्वयं मौके पर पहुंचे और स्थिति देखकर आक्रोशित हुए। उन्होंने ठेकेदार को फटकार लगाई और निगम आयुक्त मयंक मनीष को फोन कर पूरे मामले की जानकारी दी। आयुक्त ने दोषी ठेकेदार पर सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
विधायक व्यास ने कहा कि लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि नगर निगम की गौशाला में रोजाना 20 से 25 गोवंश की मौत हो रही है। मौके पर निरीक्षण के दौरान सुबह 9 बजे तक भी चारा या पानी की कोई व्यवस्था नहीं दिखी।
यह मामला न सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही का, बल्कि पशुओं के प्रति संवेदनहीनता का भी बड़ा उदाहरण है। सवाल यह उठता है कि गोवंश संरक्षण के नाम पर जो बजट खर्च किया जा रहा है, उसका वास्तविक उपयोग कौन देख रहा है और जवाबदेही तय कब होगी?