

बीपीएल परिवारों की बदलेगी किस्मत, गांव-गांव पहुंचेगी 1 लाख की मदद
रायसिंहनगर। राजस्थान सरकार ने ग्रामीण गरीबी को जड़ से खत्म करने के उद्देश्य से “पंडित दीनदयाल उपाध्याय गरीबी मुक्त गांव योजना” की शुरुआत कर दी है। इस योजना के पहले चरण में प्रदेश के ऐसे 5000 गांवों को चुना गया है, जहां बीपीएल परिवारों की संख्या अपेक्षाकृत कम है।
योजना के तहत हर चिन्हित बीपीएल परिवार पर 1 लाख रुपये तक खर्च किए जाएंगे। इसके लिए राज्य सरकार ने पहले चरण में 300 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया है। यह योजना 1 अप्रैल से पंचायती राज व ग्रामीण विकास विभाग द्वारा पूरे प्रदेश में लागू कर दी गई है।
बीपीएल परिवारों को मिलेंगे ये फायदे:
इस योजना के अंतर्गत इन परिवारों को स्वरोजगार व आजीविका उपार्जन की योजनाओं से जोड़ा जाएगा। स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाओं को 15 हजार रुपये तक की वर्किंग कैपिटल सहायता, प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना के तहत पक्का मकान, शौचालय, उज्ज्वला योजना के तहत गैस सिलेंडर, बच्चों के लिए छात्रवृत्तियां समेत कुल 102 योजनाओं से इन्हें जोड़ा जाएगा।
- Advertisement -

हर तीन माह में होगा मूल्यांकन:
योजना के प्रभाव का मूल्यांकन प्रत्येक तीन महीने में किया जाएगा। यह देखा जाएगा कि सरकार की योजनाओं से बीपीएल परिवारों के जीवन में कितना बदलाव आया है। इसके आधार पर आगे की जरूरतें तय की जाएंगी।
मिलेगा आत्मनिर्भर परिवार कार्ड और प्रोत्साहन राशि:
जिन परिवारों ने सामाजिक व आर्थिक रूप से निर्धारित 15 मानकों को पूरा कर लिया होगा, उन्हें ‘आत्मनिर्भर परिवार कार्ड’ दिया जाएगा। साथ ही, 21 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि भी दी जाएगी। हालांकि, ऐसे परिवारों को पूर्ववत सरकारी योजनाओं का लाभ मिलता रहेगा, ताकि वे स्थायी रूप से गरीबी रेखा से ऊपर उठ सकें।
इस योजना से राजस्थान के लाखों बीपीएल परिवारों के जीवन स्तर में बड़ा बदलाव आने की उम्मीद है। जिला कलेक्टरों के माध्यम से गांवों व परिवारों का सर्वे इसी माह पूरा कर लिया जाएगा।