

शहर के ऐतिहासिक पब्लिक पार्क के क्षतिग्रस्त गेट प्रशासनिक अनदेखी के शिकार हो रहे हैं। यह न केवल शहर की सुंदरता को प्रभावित कर रहे हैं, बल्कि पर्यटकों के सामने भी नकारात्मक छवि पेश कर रहे हैं।
प्रशासन की अनदेखी
शहर के प्रतिष्ठित पब्लिक पार्क के कई प्रवेश द्वार जर्जर स्थिति में हैं। विशेष रूप से जूनागढ़ किले के सामने स्थित तीन गेट पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। कई जागरूक नागरिक और सामाजिक संगठनों ने प्रशासन को इस बारे में शिकायतें दीं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
स्थानीय लोगों का कहना है कि ये टूटे गेट कभी भी हादसे का कारण बन सकते हैं। हवा के तेज झोंकों से इनके गिरने का खतरा बना रहता है, जिससे राहगीरों और पर्यटकों की सुरक्षा पर भी सवाल खड़ा हो गया है।
मुख्य मार्गों पर भी जर्जर गेट
सिर्फ पार्क ही नहीं, बल्कि सर्किट हाउस की ओर जाने वाले गेट भी भारी वाहनों की आवाजाही के चलते क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। पहले यहां लगे बैरियर को वाहन चालकों ने जानबूझकर तोड़ दिया था, लेकिन प्रशासन ने इसे दोबारा ठीक करवाने की जहमत नहीं उठाई।
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ऐतिहासिक महत्व भी प्रभावित
पार्क के मुख्य गेटों पर की गई ऐतिहासिक नक्काशी भी अब क्षतिग्रस्त हो रही है। इससे न केवल इसकी सुंदरता नष्ट हो रही है, बल्कि इसका ऐतिहासिक महत्व भी कम हो रहा है।
इससे पहले प्रशासन ने गेटों की मरम्मत करवाई थी, लेकिन घटिया निर्माण सामग्री के कारण वे जल्द ही दोबारा टूट गए।
निगम की उदासीनता से जनता नाराज
स्थानीय निवासियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने नगर निगम और जिला प्रशासन से अपील की है कि इन गेटों की जल्द से जल्द मरम्मत करवाई जाए। उनकी मांग है कि गेटों को फिर से ऐतिहासिक स्वरूप में बनाया जाए, ताकि शहर की सांस्कृतिक धरोहर को सुरक्षित रखा जा सके।