

अलवर: पैंथर पकड़ने में वन विभाग नाकाम, रिहायशी इलाके में बढ़ा डर
अलवर के राजऋषि कॉलेज परिसर में घुसा पैंथर वन विभाग के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। पंद्रह दिनों से वन विभाग इसे पकड़ने में नाकाम रहा है। पैंथर पिंजरों के आसपास तो आता है, लेकिन चकमा देकर वापस जंगल में चला जाता है। इस समस्या का समाधान ढूंढने के लिए अब जयपुर के झालाना से बड़ा पिंजरा मंगवाया गया है, जो रविवार की रात अलवर पहुंचा। इसे कॉलेज के पास जंगल में लगाया गया है।
पैंथर के कारण अब स्थानीय लोगों में डर और दहशत का माहौल है। शनिवार की रात पैंथर को मोती डूंगरी स्थित चमत्कारी हनुमान मंदिर के पास देखा गया, जहां आसपास रिहायशी इलाका है। इससे वहां के निवासियों ने सुबह-शाम टहलना भी बंद कर दिया है।
वन विभाग ने पैंथर को पकड़ने के लिए दो पिंजरे लगाए थे, जिनमें मेमने और मुर्गा चारे के रूप में रखे गए। लेकिन यह चालाक पैंथर पिंजरे में नहीं फंसा। एक बार तो पैंथर पिंजरे में आधे हिस्से तक गया, लेकिन वहां से भी वापस लौट आया।
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राजऋषि कॉलेज का 51 हैक्टेयर क्षेत्रफल वाला जंगल पैंथर के लिए आरामदायक साबित हो रहा है, जहां शिकार के लिए नीलगाय और सूअर पर्याप्त संख्या में हैं। वन विभाग का मानना है कि इसे खाने-पीने की कमी नहीं हो रही, इसलिए यह पिंजरे की ओर आकर्षित नहीं हो रहा।

पैंथर के आतंक से लोग परेशान
शनिवार को हनुमान मंदिर के पास पैंथर को देखकर लोगों में डर का माहौल बन गया। स्थानीय निवासी अब बच्चों को बाहर खेलने नहीं दे रहे। डीएफओ राजेंद्र हुड्डा ने बताया कि वन विभाग पैंथर को पकड़ने की हरसंभव कोशिश कर रहा है। बड़ा पिंजरा इसी उद्देश्य से मंगवाया गया है।
वन विभाग के कर्मचारी चौबीस घंटे मौके पर तैनात हैं, लेकिन पैंथर उनकी आंखों से बचकर लगातार घूम रहा है। विभाग के पास पैंथर की तस्वीरें हैं, लेकिन उसे पकड़ने में सफलता अभी तक नहीं मिल पाई है।
पैंथर को जल्द पकड़ने की उम्मीद के साथ वन विभाग ने अपनी कोशिशें तेज कर दी हैं, लेकिन तब तक स्थानीय लोग भय और असमंजस में जीने को मजबूर हैं।