

भारत ने फ़ाइनल में चीन की चुनौती को 1-0 से ध्वस्त किया. इस जीत के लिए भारतीय खिलाड़ियों को मैदान में काफ़ी पसीना बहाना पड़ा क्योंकि चीन से उसे जमकर चुनौती मिली.
चीन पहली बार इस चैंपियनशिप के फ़ाइनल में खेल रहा था, इस कारण उसके ऊपर किसी तरह का दबाव नहीं था.
चीन ने भारत की लगाम कसने के लिए जिस तरह की रणनीति बनाई, उसमें वह किसी हद तक कामयाब भी रहा. पर भारत आख़िरकार विजयी गोल जमाने में सफल रहा.
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जुगराज ने जमाया विजयी गोल
वैसे तो डीप डिफेंडर जुगराज का यह इस चैंपियनशिप का दूसरा गोल था. यह उनका मैदानी गोल था, जिसके लिए वह नहीं जाने जाते हैं.
भारत के फारवर्डों और हाफ लाइन के खिलाड़ियों के गोल जमाने में असफल रहने पर डीप डिफेंडर की हरमनप्रीत सिंह और जुगराज सिंह की जोड़ी ने आखिरी क्वार्टर का आठ मिनट का खेल बाकी रहने पर मोर्चा संभाला.
हरमनप्रीत सिंह सर्कल के बाएं से गेंद को लेकर अंदर घुसे. वह दो डिफेंडरों को छकाकर गोल पोस्ट के किनारे तक गए और गेंद को गोल पोस्ट के सामने माइनस किया और वहां मौजूद जुगराज सिंह ने करारे शॉट से गेंद को गोल पोस्ट में डाल दिया.
भारत की हर रणनीति रही असफल
पहला हाफ बिना किसी गोल के रहने पर भारत पर दबाव बढ़ता जा रहा था. वह पहले हाफ में गोल जमाने का हर तरीका अख्तियार कर चुके थे. पर सफलता मिलने का नाम ही नहीं ले रही थी.
इस कारण भारत ने तीसरे क्वार्टर में लंबी दूरी से गेंद को सर्कल में खड़े अपने खिलाड़ियों को पास देकर डिफलेक्शन से गोल भेदने का प्रयास किया.
इस ज़िम्मेदारी को हरमनप्रीत सिंह और मनप्रीत सिंह ने संभाला. वह अपने फारवर्डों को कुछ नपे-तुले पास देने में सफल भी रहे. पर फारवर्ड गेंद को सही से डिफलेक्ट करने में असफल रहे. ऐसा लग रहा था कि शायद आज उनका दिन नहीं है.
चीन ने हमलावर रुख से मचाई खलबली
चीन ने करीब ढाई क्वार्टर के खेल में बचाव पर ज़ोर देने और जवाबी हमले बनाने की रणनीति बनाई थी. इसका उद्देश्य भारत को गोल जमाने से रोकना था और बीच-बीच में भारतीय डिफेंस की परख भी करना था.
तीसरे क्वार्टर के आखिरी समय में उन्होंने ताबड़तोड़ हमले बनाकर भारतीय डिफेंस में खलबली मचा दी.
वह कई बार भारतीय डिफेंस को भेदने में सफल रहे पर गोल पर मौजूद कृष्ण बहादुर पाठक और सूरज करकेरा दोनों ही अपनी मौजूदगी के समय बेहतरीन बचाव से अपना गोल भेदने से बचाने में सफल रहे.

आखिरी क्वार्टर में चीन का भारत के 34 के मुकाबले 66 प्रतिशत गेंद पर कब्ज़ा इस क्वार्टर की कहानी को बयां करने के लिए काफी है. चीन ने आखिरी साढ़े चार मिनट के खेल में तो अपने गोलकीपर को हटाकर हमलों में पूरी जान लगा दी थी.
इस क्वार्टर में भारत का गेंद पर कब्ज़ा कम रहने की वजह भारत का गोल जमाने के बाद बचाव पर ध्यान देना था और वह अपने इस मकसद में कामयाब रहा. पर इस तरह की रणनीति कई बार मुश्किल में डालने वाली भी होती है.
भारत अगर चीन के गोल पर गोलकीपर नहीं होने का फायदा उठाकर दूसरा गोल जमाने का प्रयास करता और इसमें सफल हो जाता तो वह चीनी रणनीति की हवा निकाल सकता था. पर उसने बचाव पर ज़ोर देने का ही फैसला किया.
पहला क्वार्टर गोलकीपर यांग के नाम
भारत ने उम्मीदों के मुताबिक आक्रामक अंदाज़ में खेल की शुरुआत की. वह लगातार चीन के सर्कल में प्रवेश कर रहा था. पहले तो चीनी डिफेंस बेहद मुस्तैद था पर जब कभी भारत को गोल पर निशाना साधने का मौका मिल भी गया तो गोलकीपर यांग वेईहाओ ने बेहतरीन बचाव करके अपने गोल को भेदे जाने से बचा लिया.
अभिषेक ने इस क्वार्टर के दौरान गोल पर निशाना साधा और गेंद गोलकीपर से रिबाउंड हुई पर वहां मौजूद सुखजीत गेंद पर नियंत्रण नहीं बना सके और मौका बर्बाद हो गया.
पहला क्वार्टर खत्म होने से पहले अभिषेक के एक और शॉट को गोलकीपर ने रोक दिया. इस क्वार्टर में भारत कम से कम तीन बार गोल जमाने के करीब पहुंचा.
चीन को भाग्य का भी साथ मिला
भारत को दूसरे क्वार्टर में तीसरा पेनल्टी कॉर्नर मिला. इस पर गेंद को ढंग से रोका नहीं जा सका. पर खिलाड़ी ने पीछे जाकर गेंद को सर्कल में पहुंच सके हरमनप्रीत सिंह को दिया और उनके ड्रेग फ्लिक पर चीनी गोलकीपर पहली बार गच्चा खा गया लेकिन गेंद गोल पोस्ट से टकराकर खेल में वापस आ गई और डिफेंडर उसे क्लियर करने में सफल रहे.
इसी तरह एक अन्य मौके पर हरमनप्रीत सिंह द्वारा पेनल्टी कॉर्नर पर लगाई ड्रेग फ्लिक कुछ इंच बाहर से निकल गई. उस वक़्त गोलकीपर के दाहिनी तरफ काफी जगह थी और इस तरफ शॉट लगाकर गोल भेदा जा सकता था.
चीन डिफेंस को पैक करके खेला
चीन ने पहले क्वार्टर के बाद अपने डिफेंस को पैक करके खेलने की रणनीति अपनाई. उन्होंने अपने एक फारवर्ड लिन चांगलियान को ही आगे छोड़ा और जवाबी हमला बोलने के समय उन्हें लू युआनलिन और चाओ जेमिंग तैयार रहते थे.
डिफेंस में 10 खिलाड़ियों की मौजूदगी से भारतीय फारवर्ड कभी गोल भेदने के लिए जगह नहीं बना सके. इस बचाव के दौरान चीनी खिलाड़ियों ने एक अच्छा काम और किया कि वह डिफेंस करते समय अपने पैर पर गेंद लगने से बचने को लेकर भी सतर्क रहे. इस कारण भारत बहुत अधिक पेनल्टी कॉर्नरों को भी नहीं पा सका.
भारत की सफलताओं में कप्तान हरमनप्रीत सिंह की भूमिका हमेशा ही अहम रहती है, क्योंकि वह मुश्किल हालात में पेनल्टी कॉर्नरों को गोल में बदलकर भारत को संकट से निकालते रहे हैं. पर चीनी डिफेंस की ज़्यादा पेनल्टी कॉर्नर नहीं देने की रणनीति की वजह से हरमनप्रीत सिंह को बहुत ज़्यादा मौका नहीं मिल सका.
भारत जवाबी हमलों से चीनी डिफेंस में खलबली मचा सकता था. पर कुछ मौकों पर अराइजीत सिंह, अभिषेक सिंह ने जवाबी हमले बनाने का प्रयास किया पर सर्कल से पहले ही गेंद पीछे देकर चीनी खिलाड़ियों को बचाव के लिए पीछे जाने का मौका दे दिया.