उत्तराखंड के पौड़ी ज़िले में रविवार को जंगल में लगी आग थापली गांव के नज़दीक तक पहुंच गई थी.
65 साल की सावित्री देवी घर के पास रखे घास के ढेर को बचाने के लिए दौड़ीं लेकिन इस कोशिश में बुरी तरह झुलस गईं. उन्हें पहले ज़िला अस्पताल और फिर एम्स ऋषिकेश लाया गया लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका.
सावित्री देवी समेत जंगलों की आग अब तक राज्य में पांच लोगों की जान ले चुकी है और चार लोग घायल हुए हैं.
छह मई की शाम तक जंगल में आग लगने की कुल 930 घटनाएं दर्ज की गईं जिनसे 1196 हेक्टेयर से अधिक वन क्षेत्र प्रभावित हुआ है. बागेश्वर, टिहरी, उत्तरकाशी, पौड़ी समेत कई जगहों में धुएं से विज़िबिलिटी कम हो गई है.
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राज्य सरकार जंगलों में लगी आग को बुझाने के लिए एनडीआरएफ़ और एयरफ़ोर्स तक की मदद ले रही है लेकिन जंगलों का धधकना कम नहीं हो रहा है.राज्य की मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने सोमवार को सचिवालय में एक उच्च स्तरीय बैठक की.
बैठक के बाद प्रेस वार्ता में उन्होंने बताया कि जंगल की आग के नियंत्रण में लापरवाही बरतने पर अल्मोड़ा वन प्रभाग में रेंज अधिकारी, जोरासी को प्रभागीय कार्यालय स्तर पर सम्बद्ध किया गया है.
उन्होंने वन अधिकारियों को निर्देश दिए कि इसमें लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों, कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए.
बैठक के बाद आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में डीजीपी अभिनव कुमार ने बताया कि फॉरेस्ट एक्ट, वाइल्ड लाइफ़ एक्ट के साथ पब्लिक प्राइवेट प्रॉपर्टी डैमेज रिकवरी एक्ट के तहत भी कार्यवाही की जाएगी.
जो लोग बार-बार इस प्रकार की घटनाओं में लिप्त पाए जाते हैं उनके खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्यवाही की जाएगी तथा दोषियों की सम्पति भी ज़ब्त करने की कार्यवाही की जाएगी.
उत्तराखंड वन विभाग में वनाग्नि और आपदा प्रबंधन के इंचार्ज अपर प्रमुख वन संरक्षक निशान्त वर्मा ने बताया कि वन विभाग के मुख्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों को जनपद स्तरीय नोडल अधिकारी नामित कर दिया गया है तथा ऐसे सभी अधिकारी अपनी तैनाती के स्थान के लिए निकल गए हैं.
जिलाधिकारियों द्वारा खेतों में चारे आदि को जलाने तथा शहरी क्षेत्रों पर ठोस कचरे को जलाने पर पूरी तरह से प्रतिबन्ध का आदेश पारित कर दिया गया है. वन विभाग में कार्यरत लगभग 4000 फायर वाचर्स की इन्शोरेन्स की कार्यवाही शुरू कर दी गई है.
वर्मा ने बतााया कि वनाग्नि से सर्वाधिक प्रभावित पौड़ी और अल्मोड़ा जिलों में एनडीआरएफ़ की भी मदद ली जाएगी.
सोमवार को पौड़ी में एयरफ़ोर्स के हैलिकॉप्टर से वनाग्नि प्रभावित इलाकों में पानी का छिड़काव किया गया. इसके अलावा आईआईटी रूड़की के साथ क्लाउड सीडिंग के प्रस्ताव पर भी विचार किया जा रहा है.

