बीकानेर। बीकानेर के मुरलीधर व्यास कॉलोनी के नए कॉलेज में नया सेशन शुरू होने वाला है। बड़ी संख्या में गर्ल्स के एडमिशन भी इस साल होंगे लेकिन पढ़ाने के लिए अब तक कोई लेक्चरर नहीं है। हालात ये है कि इस कॉलेज में स्थायी लेक्चरर के रूप में सिर्फ प्रिंसिपल की नियुक्ति हुई है जबकि सभी विषयों के लेक्चरर पद खाली पड़े हैं।
मुरलीधर व्यास कॉलोनी के सामुदायिक भवन में अस्थायी रूप से शुरू हुए इस कॉलेज में आधा दर्जन विषयों में कॉलेज शुरू करने की मंजूरी दी गई। इसके साथ ही अनिवार्य विषय भी शुरू हुए हैं।
वर्तमान में स्थायी नियुक्ति के रूप में सिर्फ प्रिंसिपल हैं, शेष पदों के लिए अब विद्या संबल योजना के तहत अस्थायी लेक्चरर की भर्ती का प्रयास हो रहा है। कॉलेज में हिन्दी, हिस्ट्री, संस्कृत, अंग्रेजी, लोक प्रशासन, समाज शास्त्र विषय भी स्वीकृत है लेकिन एक भी लेक्चरर इन विषयों का नहीं है।
कॉलेज प्राचार्य डॉ.राजेंद्र पुरोहित ने बताया कि विद्या संबलन योजना के तहत अस्थायी रूप से भर्ती के लिए सरकार से स्वीकृति मिली हुई है। इसी आधार पर अंग्रेजी, संस्कृत, समाज शास्त्र, लोक शास्त्र के लेक्चरर की भर्ती विद्या संबल योजना के तहत होगी। ये भर्ती पूरी तरह अस्थायी होगी। इसके लिए जल्द ही आवेदन मांगे जाएंगे। चयन प्रक्रिया के बाद लेक्चरर को पीरियड के आधार पर पेमेंट देते हुए नियुक्ति दी जाएगी।
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दो लेक्चरर, दोनों पर तलवार
उच्च शिक्षा विभाग ने अनुदानित कॉलेज के जिन लेक्चरर को स्थायी किया था, उन्हें शहर में पदस्थापित नहीं किया जा सकता। फिलहाल मुरलीधर व्यास कॉलोनी के इस गर्ल्स कॉलेज में दो विषयों हिन्दी और हिस्ट्री के लेक्चरर इसी श्रेणी से लगाए गए हैं। कुछ दिन पहले ही उच्च शिक्षा विभाग के आयुक्त ने आदेश जारी कर प्रतिनियुक्ति और कार्य व्यवस्था के तहत लगे लेक्चरर को हटाने के आदेश दे दिए। अगर ये दो भी हट गए तो अकेले प्रिंसिपल ही कॉलेज में रहेंगे।
मानदंड ही पूरे नहीं
मुरलीधर व्यास नगर में शुरू हुए इस नए गर्ल्स कॉलेज में अब तक युनिवर्सिटी के मानदंड भी पूरे नहीं हो रहे हैं। महाराजा गंगा सिंह युनिवर्सिटी से मान्यता के लिए जितने लेक्चरर चाहिए, उतने लेक्चरर तो दूर एक भी नहीं है। युनिवर्सिटी चाहे तो कॉलेज की मान्यता भी खतरे में पड़ सकती है।
आवंटित भूमि को लेकर विवाद
कांग्रेस सरकार ने इस कॉलेज के लिए जो भूमि आवंटित की थी, उसे लेकर अब मामला अब कोर्ट में पहुंच गया है। बीकानेर की एक अदालत ने यहां फिलहाल स्टे दे दिया है। जिससे निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया। वैसे भवन निर्माण के लिए सरकार ने भी कोई बजट नहीं दिया है।

