बीकानेर। राज्य सरकार ने यूजी व पीजी में असमान विषय वाले 2021 से पहले नियुक्त वरिष्ठ शिक्षकों को पदोन्नति में छूट व प्रधानाचार्य पद पर पदोन्नति में शिथिलन देकर शिक्षकों की पदोन्नतियों का रास्ता साफ कर दिया है। अब तीन साल से अटकी व्याख्याताओं की पदोन्नति हो सकेगी। व्याख्याताओं की कमी से जूझ रहे सरकारी स्कूलों के बच्चों को कुछ राहत मिल सकेगी। पर ये राहत अब भी अधूरी होगी। उप प्रधानाचार्य व तृतीय श्रेणी शिक्षकों की डीपीसी का मुद्दा कोर्ट में विचाराधीन होने से अब भी केवल सैकंड ग्रेड शिक्षकों की ही डीपीसी हो सकेगी। लेकिन, इन प्रकरणों के निस्तारण के साथ यदि सरकार सही क्रम से शिक्षकों की डीपीसी करे तो उससे प्रदेश के 74 हजार शिक्षकों की पदोन्नति हो सकती है। जिसका फायदा सरकारी स्कूल की शिक्षण व्यवस्था के साथ आगामी भर्तियों में भी होगा।
भर्ती के लिए खाली होंगे पद
समय पर सही तरीके से पदोन्नति से सरकारी स्कूल के शिक्षकों व बच्चों के साथ बेरोजगार अभ्यर्थियों को भी लाभ होगा। प्रधानाचार्य से थर्ड ग्रेड शिक्षकों तक की पदोन्नति से प्रदेश में थर्ड ग्रेड के 30 हजार पद भी खाली होंगे। जो आगामी नई भर्ती का रास्ता भी तय करेंगे।
यदि सरकार मजबूत पैरवी के साथ कोर्ट में चल रहे प्रकरणों का निस्तारण करवाकर ऊपर से नीचे तक के पदों की व्यवस्थित व समयबद्ध डीपीसी करवाए तो शिक्षकों व बच्चों के साथ बेरोजगार अभ्यर्थियों को भी फायदा होगा। सरकार को इस दिशा में कदम उठाना चाहिए।
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जगदीश चोटिया, पूर्व उप निदेशक, स्कूल शिक्षा।
माननीय न्यायालय में चल रहे प्रकरणों का उचित निस्तारण और पदोन्नति प्रक्रिया को त्वरित गति देने के लिए निदेशालय स्तर पर एक अलग सैल गठित कर मई 2024 तक बकाया चार डीपीसी पूर्ण कर सरकार शिक्षकों बच्चों और बेरोजगारों को राहत प्रदान कर सकती है। इससे नए सत्र में रिक्त पद भरने से नामांकन और शैक्षिक गुणवत्ता दोनों में वृद्धि होगी।

