बीकानेर। मनरेगा में पसीना बहाने वाले श्रमिकों को पिछले करीब चार माह से मजदूरी का भुगतान नहीं हो रहा है। हालात यह है कि उन्हें रोजगार तो मिला हुआ है। लेकिन, ये मजदूर उधारगी में पसीना बहा रहे हैं।
उधारी घर चलाने को मजबूर प्रदेश के मजदूर
चित्तौडग़ढ़ जिले सहित प्रदेश भर में मनरेगा श्रमिकों को उधारी में रोजगार तो मिल गया पर परिवार को रोटी नहीं मिल पा रही है। मनरेगा श्रमिकों को राजस्थान में पिछले काफी समय से भुगतान नहीं मिल पा रहा है। इससे श्रमिकों के सामने परिवार के पालन-पोषण को लेकर समस्या खड़ी हो गई है। भुगतान को लेकर श्रमिक ग्राम पंचायतों व पंचायत समिति कार्यालयों के चक्कर लगाने को मजबूर है पर उनकी समस्या का कोई समाधान नहीं हो रहा। प्रदेश के 33 जिलों में 1 करोड़ 33 लाख 43 हजार 30 श्रमिक परिवार हैं। सभी जिलों में श्रमिकों का भुगतान बाकी है। विभाग के पोर्टल के अनुसार 18 अरब 8 करोड़ 16 लाख 56 हजार 773 रुपए की मजदूरी भुगतान अब तक लंबित है।

