बीकानेर। पाकिस्तान में एक बार फिर डांवाडोल सरकार की आशंका नजर आ रही है. मुल्क में हुए चुनाव में बड़े बड़े दावे कर रहे नवाज शरीफ और बिलावल भुट्टो की पार्टियां पीएमएल-एन और पीपीपी खाली हाथ रही हैं. ये दोनों ही पार्टियां बहुमत से दूर हैं. यही नहीं दोनों पार्टियों की जीती हुई सीटें मिला भी दें तो ये पार्टियां बहुमत के लिए जरूर 134 सीट हासिल करती नहीं दिख रही हैं.
वहीं दूसरी ओर पाकिस्तान की आवाम ने कप्तान साहब यानी कि पूर्व पीएम इमरानखा न के नाम पर भरोसा जताया है. इमरान क नाम पर इस चुनाव में उतरे निर्दलीय को अच्छी खासी कामयाबी मिली है, लेकिन इन निर्दलीयों का कोई नेता नहीं है. दूसरी ओर पाकिस्तान की फौज भी इमरान को पसंद नहीं कर रही है. ऐसे में भारत के इसप ड़ोसी मुल्क में किसकी सरकार बनेगी, येबताना मुश्किल लग रहा है. यहां अगर किसी पार्टी की सरकार बन जाती है तो वो कितनी टिकाऊ होगी, ये बताना और भी मुश्किल है.
निर्दलीय क्यों उतरे इमरान के उम्मीदवार
पाकिस्तान में इस बार मुख्य मुकाबला नवाज शरीफ की पार्टी पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) और बिलावल भुट्टो की पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) के बीच है. इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के उम्मीदवार निर्दलीय के तौर पर चुनाव लड़ने को मजबूर थे, क्योंकि उनका चुनाव चिह्न बैट चुनाव आयोग ने छीन लिया था. इमरान खान भी जेल में बंद हैं. उन्हें कई मामलों में दोषी भी करार दिया जा चुका है.

