बीकानेर। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देहरादून में राज्य विधानसभा में मंगलवार को समान नागरिक संहिता उत्तराखंड 2024 विधेयक पेश किया। अब राज्यपाल से मंजूरी मिलने के बाद विधेयक कानून बन जाएगा। समान नागरिक संहिता विधेयक पास होने के बाद कानून बन जाएगा।
मसौदे में 400 से ज्यादा धाराएं
इसके साथ ही देवभूमि उत्तराखंड देश में यूसीसी लागू करने वाला आजादी के बाद पहला राज्य होगा। सूत्रों के अनुसार, मसौदे में 400 से ज्यादा धाराएं हैं, जिसका लक्ष्य पारंपरिक रीति-रिवाजों से पैदा होने वाली विसंगतियों को दूर करना है।
शर्तें 10 जून 2022 को अधिसूचित की गई आपको बता दें कि उत्तराखंड सरकार ने मई 2022 में सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश के नेतृत्व में विशेषज्ञों की एक समिति गठित की थी। सरकार ने एक अधिसूचना 27 मई 2022 को जारी की गई थी और शर्तें 10 जून 2022 को अधिसूचित की गई थीं।
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पहली बैठक 4 जुलाई 2022 को दिल्ली में समिति ने बैठकों, परामर्शों, क्षेत्र के दौरे और विशेषज्ञों और जनता के साथ बातचीत के बाद मसौदा तैयार किया। इस प्रक्रिया में 13 महीने से अधिक का समय लगा। जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाली समिति ने अपनी पहली बैठक 4 जुलाई 2022 को दिल्ली में की थी।
ढाई लाख लोगों से सीधे मिलकर इस मुद्दे पर उनकी राय जानी
मसौदे के महत्वपूर्ण पहलुओं पर जुलाई2023 में एक मैराथन बैठक में विचार-विमर्श किया गया और इसे अंतिम रूप दिया गया। कमेटी को समान नागरिक संहिता पर ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीकों से करीब 20 लाख सुझाव मिले हैं। इनमें से कमेटी ने लगभग ढाई लाख लोगों से सीधे मिलकर इस मुद्दे पर उनकी राय जानी है।

