बीकानेर। राज्य सरकार के अवैध खनन के खिलाफ अभियान के चलते बजरी का संकट खड़ा हो गया। अवैध खनन के साथ ओवरलोड के मामले बनाए जा रहे हैं। इसके चलते लोगों को बजरी नहीं मिल पा रही है। इस कारण दिहाड़ी श्रमिकों के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो गया। ये रोजाना मजदूर मंडी में रोजगार की उम्मीद में आते हैं, लेकिन ठाले बैठे रहते हैं। शहर में रोजाना चार स्थान पर मजदूर मंडी लगती है। जहां से जरूरतमंद लोग और ठेकेदार दिहाड़ी मजदूरों को काम पर ले जाते हैं। अवैध बजरी खनन पर कार्रवाई के चलते इन मंडियों के श्रमिक ठाले बैठे हैं।
शहर में जिनके पास बजरी का स्टॉक हैं, वहां काम चल रहा है। लेकिन, जिनके पास बजरी नहीं है इनका काम बंद हो गया है। नए शुरू होने वाले निर्माण कार्यों की शुरुआत नहीं कर पा रहे हैं। इसका मुख्य कारण जहां पहले ट्रैक्टर ट्रॉली में पांच टन बजरी आती थी, अब ओवरलोड व अवैध खनन के चलते मात्र ढाई टन बजरी मिल रही है। इसकी कीमत भी ढाई हजार ट्रैक्टर ट्राली से बढ़ाकर छह हजार रुपए कर दी है। इस कारण कोई बजरी लेने को तैयार नहीं है। ऐसे में रोजाना शहर व आसपास के गांवों से रोजगार की आस में मजदूर मंडियों तक पहुंचने वाले श्रमिकों के सामने संकट खड़ा हो गया है।

