बीकानेर। ओडिशा के बालासोर में दो जून शाम सात बजे हुए ट्रेन हादसे के बाद उत्तर पश्चिम रेलवे ने संरक्षा अभियान शुरू कर दिया है। बीकानेर मंडल में अभियान के अंतर्गत संरक्षा को लेकर अधिकारियों को अलग-अलग जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। रेलवे अधिकारियों की टीमों ने ट्रैक को जांचने के साथ कोच और वैगन की चैकिंग शुरू कर दी है।यहां तक देखा जा रहा है कि किस ट्रैक पर कितनी स्पीड निर्धारित है। उस लिहाज से यहां संरक्षा के क्या इंतजाम हैं। उनकी समय-समय पर मॉनीटरिंग हो भी रही है या नहीं। इसके अलावा मेंटीनेंस ब्लॉक, रीले रूम का मेनटीनेंस, प्वाइंट क्रॉसिंग शेड्यूल इस्पेंक्शन, सुपरवाजरी स्टाफ, गार्ड और क्रू स्टाफ की ड्यूटी अवर्स पर नजर रखने के साथ चैकिंग की जा रही है। ये तय किया गया है कि बिना ब्रेक पॉवर सर्टिफिकेट के किसी भी ट्रेन का संचालन न हो।उत्तर पश्चिम रेलवे पर आधुनिकतम सिगनल प्रणाली की स्थापना के तहत वर्ष 2022-23 में 22 स्टेशनों पर इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग प्रणाली शुरू करवाई जा चुकी है। वर्तमान में उत्तर पश्चिम रेलवे के ब्रॉडगेज पर स्थित 98 प्रतिशत से अधिक स्टेशनों पर आधुनिकतम सिगनल प्रणाली स्थापित हो चुकी है। रेल कोचेज और वैगन में संरक्षा को सुदृढ़ के लिए एलएचबी रेंक का उपयोग किया जा रहा है। कोचेज में अग्निशमन यंत्र और स्मोक डिटेक्टर प्रणाली अपनाई जा रही है। साथ ही एंटी टेलीस्कोप कोच का उपयोग किया जा रहा है। यह कोच दुर्घटना के समय एक-दूसरे पर चढऩे की बजाय इधर-उधर गिरते हैं, जिससे हानि कम होती है। उधर सीनियर डीसीएम महेश चंद जेवलिया ने बताया कि डीआरएम फील्ड स्टाफ से संवाद कर रहे है ताकि संरक्षा से जुड़े कोई भी समस्या या मुद्दे हो तो। उनके संज्ञान में आए ताकि उनका तुरंत निराकरण हो सके। नाइट फुट प्लेटिंग और स्टेशन का यात्री निरीक्षण पहले से जारी है।कवच प्रणाली में बीकानेर सेकंड फेज में शामिल उत्तर पश्चिम रेलवे पर 436 करोड़ की लागत से 1586 किलोमीटर रेलमार्ग पर कवच प्रणाली स्थापित करने के लिए मंजूरी दे दी है। इस वर्ष इस प्रणाली के लिए 150 करोड़ बजट का आवंटित हुआ है। फस्र्ट फेज में च्कवचज् प्रणाली रेवाड़ी-पालनपुर वाया जयपुर, जयपुर-सवाई माधोपुर, उदयपुर-चित्तौडग़ढ़, फुलेरा-जोधपुर-मारवाड़ एवं लूनी-भीलड़ी रेलखंड पर स्वीकृत की गई है। बीकानेर मंडल की ट्रेन व कई रूटों को सेकंड फेज में लिया जाएगा।

