तेहरान/वॉशिंगटन। मध्य-पूर्व में एक बार फिर तनाव बढ़ता दिखाई दे रहा है। ईरान ने अमेरिका के साथ संभावित टकराव की आशंका के बीच अपनी सैन्य और रणनीतिक तैयारियां तेज कर दी हैं। अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों के मुताबिक तेहरान को अमेरिका की नीतियों पर भरोसा नहीं है और इसी कारण वह खुद को हर स्तर पर मजबूत करने में जुटा हुआ है। ईरान खासतौर पर होर्मुज स्ट्रेट को अपनी सबसे अहम रणनीतिक ताकत मान रहा है और जरूरत पड़ने पर इसे दबाव के हथियार के रूप में इस्तेमाल करने की तैयारी कर रहा है।
जानकारों के अनुसार ईरान की रणनीति सैन्य तैयारी, घरेलू समर्थन मजबूत करने और कूटनीतिक सक्रियता जैसे तीन प्रमुख पहलुओं पर आधारित है। हालांकि बातचीत और सीजफायर के विकल्प अब भी खुले हैं, लेकिन दूसरी ओर ईरानी सेना और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) को हाई अलर्ट पर रखा गया है।
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में गिना जाता है, जहां से वैश्विक तेल और ऊर्जा आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इस क्षेत्र में तनाव बढ़ता है तो इसका असर केवल मध्य-पूर्व तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक तेल बाजार और अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है।
ईरान ने चेतावनी दी है कि यदि संघर्ष बढ़ता है तो अमेरिकी सैन्य ठिकाने, ऊर्जा ढांचे और उससे जुड़े रणनीतिक हित निशाने पर आ सकते हैं। हाल ही में IRGC ने भी कहा था कि अमेरिका की किसी भी नई कार्रवाई का जवाब पहले से अधिक आक्रामक तरीके से दिया जाएगा।
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इसी बीच पिछले 24 घंटे में कई बड़े घटनाक्रम सामने आए हैं। ईरान ने दावा किया कि उसने अमेरिकी ड्रोन और लड़ाकू विमानों को निशाना बनाया। वहीं करीब 88 दिनों बाद देश में इंटरनेट सेवाएं आंशिक रूप से बहाल की गई हैं। दूसरी तरफ इजराइल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने सुरक्षा अधिकारियों के साथ लेबनान सीमा को लेकर अहम बैठक की। उधर अमेरिका ने होर्मुज स्ट्रेट के पास कथित रूप से बारूदी सुरंग बिछाने वाली बोट्स और बंदर अब्बास स्थित मिसाइल ठिकानों पर कार्रवाई की।
इन घटनाओं के बाद मध्य-पूर्व में युद्ध की आशंकाएं फिर तेज हो गई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हालात जल्द नहीं संभले तो इसका असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति, तेल कीमतों और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर व्यापक रूप से पड़ सकता है।
